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लालकिला कार धमाका साजिश में AI के इस्तेमाल का खुलासा, NIA ने दाखिल किया आरोपपत्र

नई दिल्ली, 25 मई 2026। लालकिला कार धमाका साजिश मामले में NIA ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस साजिश में शामिल अलकायदा से जुड़े आतंकवादियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल किया था। NIA सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने रॉकेट इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) तैयार किए थे, जिनका परीक्षण जम्मू-कश्मीर के काजीगुंड के जंगलों में किया गया था।

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने विस्फोटक उपकरणों को अधिक प्रभावी बनाने और योजना तैयार करने में AI आधारित टूल्स की मदद ली। यह खुलासा NIA द्वारा 14 मई को अदालत में दायर आरोपपत्र (Chargesheet) में किया गया है। एजेंसी फिलहाल मामले में शामिल अन्य संदिग्धों और नेटवर्क की भी जांच कर रही है।

IED तैयार करने में हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल

आरोपपत्र के मुताबिक, आतंकियों ने IED तैयार करने और उसके इस्तेमाल में लैब जैसी बारीकी और सफाई बरती। जांच में सामने आया है कि विस्फोटक उपकरणों को तकनीकी तरीके से तैयार किया गया था। NIA ने आरोपपत्र में अंसार नाम के आरोपी को भी नामजद किया है।

जांच एजेंसी के अनुसार, अंसार गजवत-उल-हिंद आतंकी मॉड्यूल का इंजीनियर था और उसका संबंध अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से था। गृह मंत्रालय पहले ही AQIS और उससे जुड़े संगठनों को आतंकी संगठन घोषित कर चुका है।

धमाके की साजिश में शामिल थे 3 डॉक्टर

एजेंसी द्वारा दायर आरोपपत्र के अनुसार, आरोपी जसीर बिलाल वानी वर्ष 2024-25 के दौरान अल फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस में 2-3 बार रुका था। जांच के मुताबिक, वह साजिश के लिए तकनीकी मदद देने के उद्देश्य से वहां ठहरा था।

जांच में खुलासा हुआ है कि विश्वविद्यालय से जुड़े 3 डॉक्टर कथित तौर पर इस साजिश में शामिल थे। जसीर बिलाल वानी को डॉ. अदील अहमद राथर ने मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी से मिलवाया था। NIA के अनुसार, उमर उन नबी इस पूरे मॉड्यूल का मुख्य संचालक था।

YouTube और AI प्लेटफॉर्म से सीखा बम बनाना

जांच में सामने आया कि आरोपी जसीर ने YouTube और AI आधारित प्लेटफॉर्म की मदद से रॉकेट IED बनाने और विस्फोटक मिश्रण तैयार करने की जानकारी जुटाई थी। आरोपपत्र के अनुसार, उसने तकनीकी जानकारी ऑनलाइन माध्यमों से हासिल कर उसे साजिश में इस्तेमाल किया।

NIA के मुताबिक, अदील ने जसीर को IED तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई थी, जबकि मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी ने तकनीकी मार्गदर्शन दिया।

ड्रोन हमले की भी थी साजिश

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी ड्रोन के जरिए सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर विस्फोटक हमला करने की साजिश रच रहे थे। आरोपियों ने सिलेंडर आधारित IED का भी परीक्षण किया था। मॉड्यूल हाईटेक तरीके से विस्फोटक उपकरण तैयार कर रहा था और इसके लिए ऑनलाइन माध्यमों व आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

आरोपपत्र में बताया गया है कि आरोपी जसीर ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए सेंसर, RF ट्रांसमीटर, सोल्डरिंग किट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मंगवाए थे। इन सामानों का इस्तेमाल IED ट्रिगर सिस्टम तैयार करने में किया गया।

जंगलों में किए गए IED परीक्षण

NIA के अनुसार, आरोपी जसीर के खुलासे के बाद जांच टीम ने जंगलों में तलाशी अभियान चलाया, जहां से विस्फोटक उपकरणों के अवशेष बरामद किए गए। एजेंसी ने इन्हें मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर जब्त किया है।

जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी ने जसीर को 2 ड्रोन उपलब्ध कराए थे। आरोपियों को इन ड्रोन की उड़ान सीमा और भार क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे, ताकि उनका इस्तेमाल विस्फोटक हमलों में किया जा सके।

NIA का कहना है कि आरोपियों ने AI आधारित प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन वीडियो और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से हाईटेक IED और ड्रोन आधारित हमले की तैयारी की थी।

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