
डमरू कश्यप
बकावंड। 29 मई 2026,बकावंड जनपद पंचायत अंतर्गत इन दिनों 15वें वित्त आयोग योजना वर्ष 2024-25 के तहत ग्राम पंचायतों के कार्यों का ऑडिट तेज़ी से जारी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला स्तर के लोकल फंड ऑडिट विभाग से नियुक्त ऑडिटर दिनेश सिंह द्वारा पंचायतों के अभिलेखों एवं विकास कार्यों की जांच की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक अब तक बकावंड जनपद की लगभग 32 ग्राम पंचायतों का ऑडिट किया जा चुका है, जबकि शेष लगभग 71 पंचायतों में प्रक्रिया जारी रहनी है। बताया जा रहा है कि बकावंड के अलावा बस्तर, दंतेवाड़ा, जगदलपुर सहित अन्य जनपद पंचायतों में भी 15वें वित्त योजना के कार्यों की समीक्षा और ऑडिट प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
ऑडिट की खबरों के बीच पंचायत सचिवों और संबंधित कर्मचारियों में हलचल का माहौल देखा जा रहा है। कई पंचायतों में दस्तावेजों को व्यवस्थित करने और पुराने अभिलेखों को दुरुस्त करने का काम तेज़ हो गया है। वहीं कुछ पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि ऑडिट प्रक्रिया केवल कागजी जांच तक सीमित न रहे, बल्कि योजनाओं की जमीनी हकीकत भी सामने आनी चाहिए।
जानकारी के अनुसार अभी तक बकावंड जनपद की बारदा और कोहकापाल पंचायतों में स्थल निरीक्षण के साथ ऑडिट किया गया है, जबकि अन्य पंचायतों में दस्तावेजी जांच का कार्य जारी है। इधर कुछ स्थानीय बुद्धिजीवियों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर आरोप लगाया कि कई बार ऑडिट प्रक्रिया पारदर्शिता से अधिक औपचारिकता बनकर रह जाती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि ऑडिट के दौरान पंचायतों में हुए विकास कार्यों, निर्माण कार्यों और वित्तीय खर्चों की वास्तविक स्थिति क्या सामने आएगी। लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद यदि अनियमितताएं मिलती हैं तो संबंधित जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
फिलहाल बकावंड जनपद पंचायत में चल रहा 15वें वित्त आयोग योजना का ऑडिट आने वाले दिनों में कई पंचायतों की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों की पारदर्शिता को लेकर तस्वीर साफ कर सकता है। अब देखना यह होगा कि यह जांच केवल कागजों तक सीमित रहती है या फिर जमीनी स्तर पर भी जवाबदेही तय की जाती है। “बस्तर डगर” की टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।




