पट्टा-नामांतरण के नाम पर लाखों की वसूली का आरोप, पटवारी की तलाश में भटक रहे ग्रामीण

बैल-बकरा बेचकर जुटाए पैसे, काम न होने पर ग्रामीण पहुंचे एसडीएम कार्यालय; निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
डमरू कश्यप
जगदलपुर/बकावंड, 04 जून 2026,बस्तर जिले के बकावंड तहसील अंतर्गत कोलावल हल्का के पूर्व पटवारी उपेंद्र बघेल पटवारी पर ग्रामीणों से जमीन संबंधी कार्यों के नाम पर लाखों रुपये वसूलने का गंभीर आरोप लगा है। ग्रामीणों का दावा है कि पट्टा, नामांतरण, सीमांकन, राजस्व अभिलेखों में सुधार तथा अन्य भूमि संबंधी कार्य जल्द कराने का भरोसा देकर संबंधित पटवारी ने कई गांवों के लोगों से बड़ी रकम ली, लेकिन न तो कार्य पूरे किए और न ही राशि वापस लौटाई।
ग्रामीणों के अनुसार राताखंडी, मैलबेड़ा, कोलावल, भिरेंडा, मोखागांव, पाथरी, लांहगा, कोदागुड़ा, कादोमाली, पड़कोट, माझीगुड़ा और सोरागुड़ा सहित कई गांवों के लोगों से अलग-अलग माध्यमों से पैसे लिए गए। आरोप है कि ग्राम पंचायत मैलबेड़ा के ग्रामीण ही लगभग 3 लाख 70 हजार रुपये दे चुके हैं, जबकि अन्य गांवों को मिलाकर यह राशि 15 से 20 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से लंबित भूमि संबंधी मामलों का जल्द निराकरण कराने का आश्वासन देकर उनसे नकद, ऑनलाइन भुगतान और अन्य माध्यमों से रकम ली गई। कई परिवारों ने अपनी मेहनत की कमाई खर्च की, तो कुछ लोगों ने बैल और बकरे तक बेचकर पैसे जुटाए, ताकि उनके जमीन संबंधी कार्य पूरे हो सकें। लेकिन लंबे समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित ग्रामीणों का आरोप है कि पैसे लेने के बाद संबंधित पटवारी क्षेत्र से लापता हो गया है और उससे संपर्क करना भी मुश्किल हो गया है। कई बार फोन और अन्य माध्यमों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन केवल आश्वासन ही मिलता रहा। जब न तो काम हुआ और न ही राशि वापस मिली, तब ग्रामीणों को अपने साथ ठगी होने का एहसास हुआ।
न्याय की उम्मीद में ग्रामीण अब तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय सहित विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इस संबंध में ग्रामीणों ने बकावंड एसडीएम को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित पटवारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मामले की जांच नहीं हुई तो और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
फिलहाल मामला ग्रामीणों के आरोपों और शिकायतों पर आधारित है। प्रशासन द्वारा जांच के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच के माध्यम से उन्हें न्याय मिलेगा और उनकी मेहनत की कमाई वापस दिलाने के साथ दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।




