
जगदलपुर, 31 मई 2026
छत्तीसगढ़ में वन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने और आदिवासी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में वन मंत्री केदार कश्यप की पहल उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। वन धन विकास केंद्र (VDVK) योजना के माध्यम से प्रदेश के वनांचल क्षेत्रों की महिलाएं आज आत्मनिर्भर बनकर सफलता की नई कहानी लिख रही हैं।
कोरबा जिले के कटघोरा वन प्रभाग के डोंगनाला स्थित हरिबोल स्वयं सहायता समूह इसका जीवंत उदाहरण है। कभी दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर रहने वाली 12 आदिवासी महिलाओं ने वन धन विकास केंद्र से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है।
वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ के सहयोग से महिलाओं को हर्बल प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद समूह ने त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, हर्बल फेस पैक, हर्बल हेयर पाउडर और हर्बल टूथ पाउडर जैसे उत्पादों का निर्माण शुरू किया।
बेहतर गुणवत्ता और बाजार की मांग के चलते इन उत्पादों को अच्छी पहचान मिली। समूह को आयुष विभाग से बड़े पैमाने पर उत्पाद आपूर्ति का ऑर्डर भी प्राप्त हुआ, जिससे उन्हें करीब 20 लाख रुपये का लाभ हुआ।
सालभर में 38.90 लाख रुपये की आय
वित्तीय वर्ष 2024-25 में हरिबोल स्वयं सहायता समूह ने लगभग 38.90 लाख रुपये का लाभ और कमीशन अर्जित किया। इससे समूह की महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और उनके परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आया।
26.11 करोड़ रुपये की संचयी बिक्री
वन धन विकास केंद्र डोंगनाला ने वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक करीब 26.11 करोड़ रुपये की संचयी बिक्री दर्ज की है। इस पहल से समूह की प्रत्येक सदस्य की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.7 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
ट्रायफेड से मिला सम्मान
महिला सशक्तिकरण और हर्बल उत्पाद निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए समूह को ट्रायफेड और विभिन्न राज्य स्तरीय मंचों पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
वन मंत्री केदार कश्यप की पहल से वन संपदा आधारित रोजगार को बढ़ावा मिला है, जिससे बस्तर सहित प्रदेश के अन्य वनांचल क्षेत्रों की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। यह मॉडल अब अन्य स्वयं सहायता समूहों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है।




