छत्तीसगढ़

धान के खेतो से आर्थिक समृद्धि तक :औषधीय खेती ने बदली किसानों की तस्वीर

रायपुर, 28 मई 2026

‘वच’ और ‘ब्राह्मी’ ने बदली किसानों की तकदीर: केदार कश्यप
धान से औषधीय खेती की ओर बढ़े कदम, “पैडी डायवर्सन मॉडल” बना किसानों की आत्मनिर्भरता का आधार

छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में राज्य सरकार का “पैडी डायवर्सन मॉडल” अब सफलता की नई मिसाल बनता जा रहा है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा संचालित इस योजना से किसानों को पारंपरिक धान खेती के बजाय औषधीय फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से नवाचार आधारित खेती मॉडल विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि औषधीय खेती केवल फसल परिवर्तन नहीं, बल्कि किसानों के लिए स्थायी आय का मजबूत माध्यम बन रही है।

उन्होंने बताया कि “पैडी डायवर्सन मॉडल” के तहत किसानों को धान के खेतों में ‘वच’ और ‘ब्राह्मी’ जैसी औषधीय फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वर्तमान में धमतरी, नारायणपुर, कोण्डागांव, बस्तर और रायपुर जिले के 23 गांवों के 147 किसानों ने 65 एकड़ भूमि पर औषधीय खेती अपनाई है।

योजना के तहत 63 किसानों ने 39 एकड़ भूमि पर ‘वच’ की खेती की, जबकि 84 किसानों ने 26 एकड़ क्षेत्र में ‘ब्राह्मी’ का उत्पादन किया। सबसे अधिक सफलता धमतरी जिले में देखने को मिली, जहां 16 गांवों के 90 किसानों ने 27.5 एकड़ भूमि पर औषधीय खेती कर बेहतर आय अर्जित की। वहीं रायपुर जिले के 35 किसानों ने 11.5 एकड़ क्षेत्र में औषधीय फसलें उगाकर उल्लेखनीय लाभ कमाया।

वन मंत्री ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बाजार आधारित औषधीय खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मॉडल कम लागत में अधिक लाभ देने वाला सफल विकल्प बनकर उभरा है।

बोर्ड द्वारा किसानों को नि:शुल्क औषधीय पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही तकनीकी प्रशिक्षण, सफल किसानों के खेतों का अध्ययन भ्रमण तथा उत्पाद की खरीदी के लिए अनुबंधित संस्थाओं के माध्यम से बाजार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। इससे किसानों को उत्पादन और विपणन दोनों स्तरों पर सहायता मिल रही है।

बोर्ड के अनुसार, एक एकड़ में ‘वच’ और ‘ब्राह्मी’ की खेती पर किसानों की लागत लगभग 20 हजार रुपये आई, जबकि एक वर्ष में प्रति एकड़ करीब एक लाख रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त हुई। कम लागत और बेहतर मुनाफे के कारण किसानों का रुझान तेजी से औषधीय खेती की ओर बढ़ रहा है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को केवल सहायता नहीं, बल्कि स्थायी आय का प्रभावी मॉडल देने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और सुनिश्चित बाजार उपलब्ध होने पर खेती को अत्यधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। आज “पैडी डायवर्सन मॉडल” से जुड़े किसान आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की नई मिसाल बन रहे हैं।

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