प्रधानमंत्री ग्राम सड़क बनी “मक्का सुखाने का मैदान”, 1 किलोमीटर तक सड़क जाम — जनप्रतिनिधि मौन!

बकावंड ब्लॉक के सतोषा पंचायत में बड़े किसानों की मनमानी, सड़क पर मक्का फैलाकर आवागमन बाधित — ग्रामीणों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की
डमरू कश्यप
बकावंड 24 मई 2026/ बस्तर जिले के विकासखंड बकावंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सतोषा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क इन दिनों ग्रामीणों की सुविधा के बजाय “मक्का सुखाने के मैदान” में तब्दील होती नजर आ रही है। आरोप है कि सतोषा सहित चिकलपदर, गोटीगुड़ा और आसपास के कुछ बड़े किसानों द्वारा लगभग एक किलोमीटर तक सड़क पर मक्का फैलाकर मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया गया है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि सड़क के दोनों किनारों पर लकड़ी और बांस लगाकर अस्थायी घेराबंदी कर दी गई है, जिससे आम लोगों, बाइक चालकों और चार पहिया वाहनों को आने-जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर सड़क पूरी तरह मक्का से ढकी दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य गांवों को बेहतर सड़क सुविधा देकर आवागमन आसान बनाना था, लेकिन यहां सड़क को निजी उपयोग में लेकर खुलेआम कब्जा कर लिया गया है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर इतनी लंबी दूरी तक सड़क घेरकर मक्का सुखाने की अनुमति किसने दी?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि यही काम कोई गरीब या सामान्य ग्रामीण करता तो प्रशासन तत्काल कार्रवाई कर देता, लेकिन प्रभावशाली किसानों के मामले में जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे हुए हैं। इससे जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों ने इसे सड़क सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ बताया है। उनका कहना है कि रात के समय सड़क पर फैला मक्का और लगाए गए अस्थायी अवरोध किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं। लगातार दुर्घटना की आशंका बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
वर्जन:
मामले की जानकारी मिलने पर एसडीएम मनीष वर्मा ने कहा कि सड़क जाम कर मक्का सुखाने की शिकायत गंभीर है। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों को तत्काल सड़क खाली कराने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। एसडीएम ने कहा कि करपावंड थाना प्रभारी शिवानंद सिंह से भी बात कर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क को निजी खेत और खलिहान की तरह इस्तेमाल करने वालों पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर नियम केवल आम लोगों तक ही सीमित रहेंगे? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और सड़क को जल्द खाली कराने की मांग की है।




