
जगदलपुर/डिमरापाल, 23 जून 2026
बस्तर संभाग के एकमात्र मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल डिमरापाल में किए गए शोध में आंखों की दो गंभीर बीमारियां कोर्निया अल्सर (Corneal Ulcer) और यूवाइटिस (Uveitis) लोगों की दृष्टि के लिए बड़ा खतरा बनकर सामने आई हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार समय पर जांच और उपचार नहीं मिलने पर ये बीमारियां स्थायी दृष्टिहीनता का कारण बन सकती हैं।
मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग में दो मेडिकल छात्रों द्वारा किए गए अध्ययन में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। शोध के अनुसार इन बीमारियों से पीड़ित सैकड़ों मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन जागरूकता की कमी और इलाज में देरी के कारण कई मामलों में स्थिति गंभीर हो जाती है।

यूवाइटिस के मामलों में महिलाएं अधिक प्रभावित
शोधकर्ता डॉ. श्रुति कंवर ने बताया कि यूवाइटिस के मरीजों में महिलाओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाई गई है। यूवाइटिस आंख के अंदर स्थित यूविया परत में होने वाली सूजन है, जो संक्रमण, चोट या शरीर की अन्य बीमारियों के कारण हो सकती है।
इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में आंखों में दर्द, रोशनी से परेशानी, धुंधला दिखाई देना और दृष्टि कमजोर होना शामिल हैं। शोध के दौरान बस्तर क्षेत्र में 103 मरीज यूवाइटिस से प्रभावित पाए गए, जिनमें अधिकांश महिलाएं थीं। विशेषज्ञों के अनुसार 30 से 50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में यह बीमारी अधिक देखने को मिलती है।
डॉ. कंवर ने बताया कि समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह बीमारी स्थायी रूप से आंखों की रोशनी प्रभावित कर सकती है। वहीं दवाओं का पूरा कोर्स नहीं लेने पर बीमारी दोबारा लौटने की आशंका भी बनी रहती है।
खेती-किसानी के दौरान चोट बन रही कोर्निया अल्सर की वजह
शोधकर्ता डॉ. विनीत कौशिक ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी और जंगल आधारित कार्यों के दौरान आंखों में लगने वाली चोटें कोर्निया अल्सर का प्रमुख कारण बन रही हैं। धान की बालियां, लकड़ी की टहनियां, घास-फूस और अन्य वन उत्पादों के संपर्क से आंखों में चोट लगने के बाद संक्रमण विकसित हो जाता है।
इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में आंख लाल होना, दर्द, पानी आना और धुंधलापन शामिल हैं। अधिकांश लोग इन संकेतों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे संक्रमण गंभीर रूप ले लेता है।
शोध में शामिल 85 मरीजों में से 7 दिनों के भीतर उपचार लेने वाले लगभग 60 प्रतिशत मरीजों की दृष्टि वापस लौट आई, जबकि करीब 30 प्रतिशत मरीजों की दृष्टि आंशिक रूप से प्रभावित हुई। वहीं 5 से 10 प्रतिशत मामलों में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मरीजों की दृष्टि पूरी तरह समाप्त होने की कगार पर पहुंच गई।
घरेलू उपचार और झाड़-फूंक बढ़ा रहे खतरा
नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. छाया शोरी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग आंखों की समस्या होने पर पहले घरेलू नुस्खों, झाड़-फूंक या बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का उपयोग करते हैं। कई मामलों में आंखों में तेल, जड़ी-बूटी या अन्य पदार्थ डाल दिए जाते हैं, जिससे संक्रमण और अधिक गंभीर हो जाता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि आंखों में चोट लगने, दर्द होने या धुंधला दिखाई देने जैसी किसी भी समस्या को हल्के में न लें और तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। शुरुआती चरण में उपचार मिलने पर कोर्निया अल्सर और यूवाइटिस दोनों का सफल इलाज संभव है, लेकिन देरी होने पर ऑपरेशन या जटिल उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।
डॉक्टरों की सलाह
- खेती या जंगल में काम करते समय सुरक्षात्मक चश्मे का उपयोग करें।
- आंख में चोट लगने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के कोई आई ड्रॉप या दवा का उपयोग न करें।
- घरेलू उपचार और झाड़-फूंक से बचें।
- आंख लाल होने, दर्द या धुंधलापन महसूस होने पर तुरंत जांच कराएं।
शोध से स्पष्ट हुआ है कि बस्तर में कोर्निया अल्सर और यूवाइटिस केवल सामान्य आंखों की बीमारियां नहीं हैं, बल्कि दृष्टिहीनता का बड़ा कारण बन सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, समय पर जांच और सही उपचार ही आंखों की रोशनी बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।




