अविश्वास प्रस्ताव पर भूपेश बघेल का सरकार पर हमला, बोले- ‘अदृश्य शक्ति’ के इशारे पर चल रही सरकार

रायपुर, 18 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने साय सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ‘अदृश्य शक्ति’ के इशारे पर चल रही है और पिछले ढाई वर्षों में हर मोर्चे पर विफल रही है।
अपने करीब एक घंटे के संबोधन में भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार के जवाबों में कोई ठोस बात नहीं थी और जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार पूरी तरह असफल रही है। उन्होंने किसानों, खाद संकट, धान खरीदी, कानून व्यवस्था, आदिवासी हित, स्वास्थ्य व्यवस्था, खनन, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर सरकार को घेरा।
उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह विफल रही है। किसानों को डीएपी और उर्वरकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है तथा बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है।
भूपेश बघेल ने कहा कि महतारी वंदन योजना, राशन वितरण, केवाईसी, विधवा पेंशन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी गंभीर खामियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 30 लाख लोगों को केवाईसी नहीं होने के कारण राशन नहीं मिल सका।
कानून व्यवस्था के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में अवैध खनन, हत्या, रेत माफिया, नकली खाद, महादेव ऐप, बलौदाबाजार हिंसा और अन्य मामलों में सरकार प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है। उन्होंने कई मामलों में सीबीआई जांच की मांग का भी उल्लेख किया।
आदिवासी क्षेत्रों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने तमनार, हसदेव और बस्तर में जंगलों की कटाई तथा खनन गतिविधियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पेसा कानून कांग्रेस सरकार ने लागू किया था और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा में वर्तमान सरकार असफल रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का स्वास्थ्य ही खराब है। उन्होंने मेकाहारा अस्पताल की स्थिति और ब्लैकलिस्टेड कंपनी से दवा खरीदने का आरोप लगाया।
अपने संबोधन के अंत में भूपेश बघेल ने कहा कि विपक्ष द्वारा प्रस्तुत 136 बिंदुओं वाला आरोप पत्र सरकार की विफलताओं का प्रमाण है और सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।




