
कांकेर , 21/05/26। जिले के अंतागढ़ विकासखंड की सभी 56 ग्राम पंचायतों के सरपंचों द्वारा सामूहिक इस्तीफा सौंपे जाने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। पिछले तीन दिनों से गोल्डन चौक में बेमियादी हड़ताल पर बैठे सरपंचों के इस कदम को पंचायत व्यवस्था की विफलता और प्रशासनिक उदासीनता से जोड़कर देखा जा रहा है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश सचिव एवं छत्तीसगढ़ सरपंच संघ की पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष श्यामकुमारी ध्रुव ने इसे बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति बताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि पंचायतों की लगातार उपेक्षा, विकास कार्यों की अनदेखी और प्रशासन की निष्क्रियता के कारण लिया गया है।
श्यामकुमारी ध्रुव ने कहा कि पिछले एक वर्ष से ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को स्वीकृति नहीं मिलने से सरपंच अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। गांवों में मूलभूत सुविधाओं और विकास कार्यों पर असर पड़ा है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरपंच गांव की सरकार के रूप में कार्य करते हैं, लेकिन यदि उन्हें आवश्यक स्वीकृति और संसाधन ही उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे, तो पंचायत व्यवस्था कमजोर होना स्वाभाविक है। उन्होंने याद दिलाया कि बीते वर्ष सरपंच संघ के आंदोलन के दौरान प्रशासन ने 15 दिनों के भीतर लंबित कार्यों को स्वीकृति देने का आश्वासन दिया था, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
श्यामकुमारी ध्रुव ने चेतावनी देते हुए कहा कि अंतागढ़ विकासखंड के 56 सरपंचों का सामूहिक इस्तीफा सरकार और प्रशासन के लिए एक बड़ा संदेश है। यदि जल्द ही पंचायतों के लंबित विकास कार्यों को स्वीकृति नहीं दी गई और पंचायत प्रतिनिधियों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो प्रदेशभर में सरपंच संघ आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होगा।
उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि अंतागढ़ सहित प्रदेश की सभी पंचायतों में लंबित विकास कार्यों को शीघ्र स्वीकृति दी जाए तथा पंचायत प्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक कार्य करने का अवसर उपलब्ध कराया जाए।




