सीपीआई का कांग्रेस-भाजपा पर तीखा वार : महिला आरक्षण को लेकर अवसरवादिता का आरोप, गीता मुखर्जी के सपनों की अनदेखी का दावा

कोंडागांव, 01 मई 2026। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) छत्तीसगढ़ राज्य परिषद ने महिला आरक्षण और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर कांग्रेस और भाजपा पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी ने इसे अवसरवादी राजनीति करार देते हुए दोनों दलों की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
सीपीआई ने अपने बयान में कहा कि कामरेड Geeta Mukherjee द्वारा 1996 में महिला आरक्षण (33 प्रतिशत) के लिए रखे गए ऐतिहासिक विधेयक के मूल उद्देश्य को आज की राजनीति में भटका दिया गया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ने इस मुद्दे को लंबे समय तक राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन इसे जमीनी स्तर पर लागू करने में गंभीरता नहीं दिखाई।
पार्टी के अनुसार, कांग्रेस ने अपने लंबे शासनकाल के बावजूद महिला आरक्षण विधेयक को अंतिम रूप नहीं दिया, जबकि भाजपा द्वारा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम पर इसे आगे बढ़ाने का दावा किया गया, लेकिन परिसीमन का हवाला देकर इसके प्रभावी क्रियान्वयन को टाल दिया गया।
सीपीआई छत्तीसगढ़ राज्य परिषद ने मांग की है कि इस अधिनियम को बिना किसी देरी और शर्त के तुरंत लागू किया जाए। साथ ही, ओबीसी और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए उप-आरक्षण का प्रावधान भी सुनिश्चित किया जाए ताकि यह व्यवस्था अधिक समावेशी बन सके।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) Communist Party of India ने यह भी कहा कि कामरेड गीता मुखर्जी जैसे नेताओं के संघर्ष और योगदान को किसी भी राजनीतिक दल द्वारा चुनावी लाभ के रूप में प्रस्तुत करना अनुचित है। पार्टी ने महिलाओं से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के रुख को समझते हुए अपने अधिकारों के लिए एकजुट हों।
सीपीआई ने दोहराया कि वह संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित होने तक अपने संघर्ष को जारी रखेगी।




