
जगदलपुर, 5 जुलाई 2026
बस्तर शांति समिति के तत्वावधान में 05 जुलाई को सिरहासार चौक, जगदलपुर में ‘सलवा जुडुम स्मृति दिवस’ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में माओवादी हिंसा में मारे गए निर्दोष ग्रामीणों एवं देश की सुरक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सुरक्षा बलों के जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, नक्सल हिंसा से पीड़ित परिवारों, पूर्व सैनिकों, जनजाति समाज के प्रतिनिधियों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत पुष्पांजलि अर्पित कर दिवंगतों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई।
इस अवसर पर नक्सल विषय की विशेषज्ञ एवं लेखिका रचना नायडू ने बस्तर में माओवादी हिंसा की पृष्ठभूमि, उसके सामाजिक प्रभाव और ग्रामीणों पर पड़े दुष्प्रभावों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा से हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं और इसके इतिहास को समाज के सामने लाना आवश्यक है।
बस्तर शांति समिति के जयराम दास ने कहा कि 05 जुलाई 2011 को सलवा जुडुम पर प्रतिबंध लगने के बाद क्षेत्र में माओवादी हिंसा का दायरा बढ़ा और अनेक निर्दोष ग्रामीण इसकी चपेट में आए। उन्होंने इस विषय पर व्यापक जनचर्चा और गंभीर अध्ययन की आवश्यकता बताते हुए इतिहास के विभिन्न पहलुओं पर निष्पक्ष विमर्श की बात कही। इस दौरान नक्सल हिंसा से पीड़ित हिड़मु राम भी उपस्थित रहे।
मंगऊ राम कावड़े ने कहा कि सलवा जुडुम स्मृति दिवस किसी संगठन या व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन हजारों निर्दोष ग्रामीणों और वीर सुरक्षा बलों के जवानों के बलिदान को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने माओवादी हिंसा के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए।
जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि सलवा जुडुम बस्तर के जनजातीय समाज का एक महत्वपूर्ण जनआंदोलन था, जिसके इतिहास का निष्पक्ष अध्ययन और दस्तावेजीकरण आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां वास्तविक घटनाओं से परिचित हो सकें।
कार्यक्रम में किशोर पारख और दशरथ कश्यप ने भी माओवादी हिंसा में मारे गए निर्दोष ग्रामीणों एवं सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए समाज से सभी पीड़ितों के प्रति संवेदनशील रहने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगतों को श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा बस्तर में स्थायी शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए सामूहिक संकल्प लिया।




