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बस्तर में बाढ़ प्रभावित किसानों का बड़ा आंदोलन, 300 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ जगदलपुर पहुंचकर कलेक्ट्रेट का किया घेराव

बस्तर,7 नवम्बर 2026

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में बाढ़ से फसल बर्बाद होने के बाद किसानों का आक्रोश शुक्रवार को सड़कों पर देखने को मिला। पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलने से नाराज हजारों किसान 300 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ जगदलपुर पहुंचे और जिला कलेक्ट्रेट का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने पहले लालबाग मैदान में सभा कर अपनी मांगें रखीं। इसके बाद ट्रैक्टरों के काफिले के साथ शहर की सड़कों पर रैली निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे।

करीब दो घंटे तक कलेक्ट्रेट के सामने किसानों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। किसानों के हाथों में बर्बाद फसलें थीं और वे सरकार से उचित मुआवजे की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि बाढ़ के कारण खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, लेकिन नुकसान के मुकाबले सरकार की ओर से दी जा रही राहत राशि पर्याप्त नहीं है।

किसानों ने बताया कि बाढ़ से उनकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है। कई गांवों में परिवारों के सामने खाने-पीने की सामग्री जुटाने तक की परेशानी खड़ी हो गई है। किसानों का कहना है कि खेती में मजदूरी, खाद और बीज सहित काफी खर्च होता है, जबकि वर्तमान मुआवजा राशि से उनकी लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है। ऐसे में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है।

प्रति हेक्टेयर 65,100 रुपये मुआवजे की मांग

मामले में अपर कलेक्टर दिले राम दाहिरे ने बताया कि बाढ़ के कारण जिले में करीब 6 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा था। सर्वे के बाद लगभग 4 हजार हेक्टेयर प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की मुआवजा राशि दी गई है। वहीं, करीब 2 हजार किसानों की राशि संबंधित दस्तावेजों की कमी के कारण बैंकों में अटकी हुई है।

उन्होंने बताया कि अलग-अलग किसान संगठनों के प्रतिनिधि अपनी मांगों को लेकर पहुंचे हैं। किसानों की ओर से प्रति हेक्टेयर 65,100 रुपये मुआवजा देने की मांग की जा रही है। उनकी मांगों को शासन स्तर पर भेजा जाएगा।

फिलहाल किसान अपनी मांगों पर उचित कार्रवाई की उम्मीद जता रहे हैं। उनका कहना है कि बाढ़ से हुए वास्तविक नुकसान के अनुसार मुआवजा मिलना चाहिए, ताकि वे दोबारा खेती और अपने परिवार का जीवनयापन कर सकें।

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