छत्तीसगढ़

रायपुर में AI गणपति प्रतिमाओं से दूरी, विवाद के बाद पारंपरिक स्वरूपों पर मूर्तिकारों का जोर

रायपुर,27 जुलाई 2026

आगामी 14 सितंबर से शुरू होने वाले गणेश उत्सव की तैयारियां राजधानी रायपुर में जोरों पर हैं। शहर में इस वर्ष 15 हजार से अधिक छोटी-बड़ी गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी। मूर्तिकार दिन-रात प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस बार भगवान गणेश के शिव, श्रीराम, श्रीकृष्ण, बाल गणेश, बालाजी और अर्धनारीश्वर स्वरूपों की प्रतिमाओं की सबसे अधिक मांग देखने को मिल रही है।

हालांकि, इस वर्ष एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अधिकांश मूर्तिकार AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित डिजाइन वाली प्रतिमाएं बनाने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले वर्ष रायपुर के लाखे नगर में AI शैली की गणेश प्रतिमा को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन और पुलिस तक शिकायत पहुंची थी। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार धार्मिक मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

मूर्तिकार यशवंत ने बताया कि कई ग्राहक AI से तैयार तस्वीरें लेकर प्रतिमा बनवाने पहुंचते हैं, लेकिन पूजा-अर्चना के लिए बनाई जाने वाली प्रतिमाओं में धार्मिक परंपरा और आस्था सर्वोपरि है। इसलिए ऐसे डिजाइन स्वीकार नहीं किए जा रहे, जिनसे भविष्य में विवाद की आशंका हो।

मूर्तिकारों के अनुसार इस बार शिव रूप, श्रीराम, श्रीकृष्ण, बाल गणेश, बालाजी और अर्धनारीश्वर स्वरूप की प्रतिमाओं की बुकिंग सबसे अधिक हुई है। समितियों से लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं और देर रात तक रंगाई-सजावट का कार्य जारी है। उनका कहना है कि तकनीक का उपयोग कार्य को आसान बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन धार्मिक प्रतिमाओं में केवल आकर्षण या सोशल मीडिया पर वायरल होने के उद्देश्य से प्रयोग उचित नहीं है।

वहीं, हिंदू स्वाभिमान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष विश्वादिनी पांडेय ने कहा कि सभी मूर्तिकारों और गणेश समितियों से अनुरोध किया गया है कि पिछले वर्ष जैसी AI आधारित प्रतिमाओं की स्थापना से बचें। यदि किसी प्रकार से धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं तो संगठन विरोध करेगा।

सीनियर एडवोकेट विराट वर्मा के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी धर्म, देवी-देवता या धार्मिक प्रतीक का अपमान करता है अथवा धार्मिक भावनाएं आहत करने वाला कार्य करता है, तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। शिकायत मिलने पर पुलिस जांच कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाती है।

इतिहासकारों के अनुसार रायपुर का सार्वजनिक गणेश उत्सव लगभग 125 वर्ष पुराना है। इसकी शुरुआत पुरानी बस्ती, गुढ़ियारी और बनियापारा से हुई थी। बाद में यह परंपरा पूरे शहर में फैल गई। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी गणेश उत्सव सामाजिक एकजुटता और राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण माध्यम बना था। आज भी इसे आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

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