देव बालिफूल की परंपरा को संजोकर रखें, संस्कृति को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी युवाओं की: लखेश्वर बघेल

जगदलपुर, 10 जून 2026
बस्तर और ओडिशा के दो गांवों के बीच सदियों से चली आ रही देव बालिफूल की अनूठी परंपरा सामाजिक सौहार्द, मेल-मिलाप और सांस्कृतिक एकता की मिसाल बनी हुई है। मंगलवार को बस्तर जिले के ग्राम सन्धकरमरी में आयोजित देव बालिफूल उत्सव में छत्तीसगढ़ विधानसभा के उपनेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल ने मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर इस परंपरा को संरक्षित रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि बस्तर की जनजातीय संस्कृति में मित्रता और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने की कई अनूठी परंपराएं हैं। व्यक्ति-व्यक्ति के बीच मीत और बालिफूल बनने की परंपरा तो है ही, लेकिन जब दो पूरे गांव आपस में बालिफूल बनते हैं तो यह सांस्कृतिक एकता का अद्भुत उदाहरण बन जाता है। उन्होंने कहा कि सन्धकरमरी और ओडिशा के मोतीगांव के देवी-देवताओं के बीच भी देव बालिफूल का संबंध है, जो इस परंपरा की प्राचीनता और महत्व को दर्शाता है।
लखेश्वर बघेल ने कहा कि यह परंपरा कब शुरू हुई, इसका सटीक इतिहास भले ज्ञात न हो, लेकिन यह हमारी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।
सरहद नहीं बनी रिश्तों में बाधा
सन्धकरमरी और मोतीगांव के बीच करीब सात किलोमीटर की दूरी है तथा दोनों गांवों के बीच राज्य की सीमा भी पड़ती है। इसके बावजूद दोनों गांवों के बीच वर्षों से रोटी-बेटी का संबंध और सांस्कृतिक जुड़ाव कायम है। हर वर्ष बारी-बारी से दोनों गांवों के ग्रामीण अपने देवी-देवताओं के साथ एक-दूसरे के गांव पहुंचते हैं और देव बालिफूल उत्सव मनाते हैं।
उत्सव के दौरान आगंतुकों का पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने अतिथियों के पैर धोकर, तिलक लगाकर तथा गमछा और पागा पहनाकर सम्मान किया। देव मिलन के बाद सामूहिक भोज का आयोजन हुआ, जिसमें दोनों गांवों के लोगों ने सुख-दुख में साथ रहने, जंगलों की रक्षा करने और पारस्परिक सहयोग बनाए रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में मोतीगांव से चैतू सिरहा, बुधराम कलार, लैखन पुजारी, तुला सिरहा, भास्कर पुजारी, विद्या पुजारी, राजमन पुजारी, सरपंच नवीना, चित्रकला कलार और लखन भतरा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। वहीं सन्धकरमरी से पूर्व सरपंच तुलाराम बघेल, दामोदर कश्यप, मेघनाथ नाग, बेनीराम कश्यप, सुंदर सेठिया समेत दोनों गांवों के सैकड़ों ग्रामीण उत्सव के सहभागी बने।




