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बस्तर दशहरा से पहले भी अधूरा अंडरग्राउंड बिजली प्रोजेक्ट, तीसरे साल भी इंतजार बरकरार

करीब 5 करोड़ की परियोजना अब तक पूरी नहीं, रथ मार्ग पर दुकानों के सर्विस कनेक्शन शिफ्ट होना बाकी; विभाग ने 15 अगस्त तक काम पूरा करने का किया दावा

जगदलपुर 06 अगस्त 2026

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की परंपरा को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया अंडरग्राउंड बिजली प्रोजेक्ट तीसरे वर्ष भी अधूरा पड़ा है। करीब पांच करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम तय समय सीमा में पूरा नहीं हो सका, जबकि इस बार बस्तर दशहरा शुरू होने में दो महीने से भी कम समय बचा है।

इस परियोजना का उद्देश्य दशहरा रथ चलन मार्ग पर मौजूद बिजली लाइनों को भूमिगत करना था, ताकि रथ यात्रा के दौरान हर वर्ष बिजली आपूर्ति बंद करने की आवश्यकता न पड़े और श्रद्धालुओं के साथ-साथ शहरवासियों को निर्बाध बिजली मिल सके।

परियोजना के तहत लगभग 5 किलोमीटर लो-टेंशन (एलटी) लाइन, 720 मीटर 11 केवी लाइन तथा रथ मार्ग में आने वाले चार ट्रांसफार्मरों को हटाने और स्थानांतरित करने का कार्य शामिल था। योजना पूरी होने के बाद दशहरा के दौरान बिजली व्यवस्था सुचारु रखने का दावा किया गया था।

हालांकि, दो वर्ष बीत जाने के बावजूद बाजार और रथ मार्ग से लगी कई दुकानों के सर्विस कनेक्शन अब तक शिफ्ट नहीं किए जा सके हैं। यही कारण है कि परियोजना अब भी अधूरी है और इसकी समयसीमा पर सवाल उठ रहे हैं।

सीएसईबी के प्रोजेक्ट अधिकारी सलीम खान ने बताया कि 11 केवी लाइन का कार्य पूरी तरह पूरा हो चुका है, जबकि एलटी लाइन का अधिकांश काम भी समाप्त हो गया है। अब केवल दुकानों के सर्विस वायर शिफ्ट करने का कार्य शेष है।

उन्होंने देरी का कारण बताते हुए कहा कि इस कार्य के लिए बार-बार बिजली शटडाउन की आवश्यकता थी, लेकिन बीच-बीच में केंद्रीय मंत्रियों और अन्य वीआईपी दौरों के कारण आवश्यक शटडाउन नहीं मिल पाया। इसी वजह से परियोजना निर्धारित समय पर पूरी नहीं हो सकी।

विभाग का दावा है कि शेष कार्य 15 अगस्त से पहले पूरा कर लिया जाएगा, जिससे इस वर्ष बस्तर दशहरा के दौरान रथ यात्रा बिना बिजली आपूर्ति बाधित किए संपन्न कराई जा सके।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार विभाग अपने वादे पर खरा उतर पाएगा और बस्तर दशहरा के दौरान रथ बिना बिजली कटौती के अपने पारंपरिक मार्ग से गुजर सकेगा, या फिर करोड़ों रुपये की यह परियोजना एक बार फिर अधूरे वादों और बढ़ती समयसीमा की कहानी बनकर रह जाएगी। बस्तर की आस्था से जुड़ी इस महत्वपूर्ण परियोजना पर अब शहरवासियों और प्रशासन—दोनों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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