48 घंटे के रेस्क्यू और निगरानी के बाद मां से मिले तेंदुए के दोनों शावक

बस्तर,25 अगस्त 2026
बस्तर वनमंडल में वन्यप्राणी संरक्षण और मानव-वन्यजीव संवेदनशीलता की एक सराहनीय मिसाल सामने आई है। चित्रकोट रेंज के दुर्गम पहाड़ी वन क्षेत्र में वन विभाग ने करीब 48 घंटे तक चले रेस्क्यू और रेयूनाइट मिशन के बाद तेंदुए के दो शावकों को उनकी मां से सुरक्षित मिला दिया।
जानकारी के अनुसार 22 अगस्त को ग्रामीण बच्चों द्वारा तेंदुए के एक शावक को उठाए जाने की सूचना वन विभाग को मिली। विभागीय टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए रात 11:20 बजे शावक को सुरक्षित संरक्षण में लिया। इसके बाद उसी रात घने जंगल में सुबह करीब 4 बजे शावक को चिन्हित स्थान पर सुरक्षित छोड़ दिया गया।
हालांकि, अगले दिन निगरानी के दौरान पता चला कि मादा तेंदुए ने शावक को स्वीकार नहीं किया है। इसके बाद वन विभाग ने ग्रामीणों के सहयोग से दूसरे शावक की तलाश शुरू की। दोनों शावकों को सुरक्षित स्थान पर एक साथ रखा गया और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरे लगाए गए।
लगातार निगरानी के बाद सोमवार रात ट्रैप कैमरे में वह तस्वीर कैद हुई, जिसका वन विभाग की टीम को इंतजार था। मादा तेंदुआ वापस लौटी और आखिरकार दोनों शावकों को अपने साथ ले गई।
यह पूरा अभियान वन विभाग की तत्परता, ग्रामीणों के सहयोग और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता की मिसाल बन गया। दोनों शावकों का अपनी मां से सुरक्षित मिलन वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।
वन्यप्राणी संरक्षण के इस संवेदनशील मिशन में जुटी वन विभाग की टीम और सहयोगी ग्रामीणों के प्रयासों की सराहना की जा रही है। मुख्यमंत्री और वनमंत्री के वन्यजीव संरक्षण के संकल्प के अनुरूप बस्तर वनमंडल की यह पहल मानव और वन्यजीव के बीच सह-अस्तित्व की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण है।




