छत्तीसगढ़बस्तर संभाग

इंद्रावती का पवित्र जल लेकर प्राचीन शिव मंदिर पहुंचे 1200 कांवड़िए, आठ गांवों के श्रद्धालु हुए शामिल

बस्तर, 25 अगस्त 2026

सनातन परंपरा और भगवान शिव के प्रति आस्था को समर्पित पंचम वर्ष कांवड़ यात्रा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ आयोजित की गई। इस यात्रा में आठ गांवों के करीब 1200 कांवड़ियों ने हिस्सा लिया।

कांवड़ियों ने बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी के भोंड एनीकट स्थित पूंजीगुड़ा घाट से पवित्र जल भरा। इसके बाद श्रद्धालुओं ने करीब पांच किलोमीटर की कांवड़ यात्रा पूरी करते हुए बस्तर स्थित प्राचीन शिव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया।

जगह-जगह हुआ कांवड़ियों का भव्य स्वागत

कांवड़ यात्रा के दौरान ग्राम पंचायत भोंड के ग्रामीणों ने कांवड़ियों के पैर धोकर तिलक-वंदन किया। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और फलों की व्यवस्था की गई। यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर शिवभक्तों और ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर कांवड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह पेयजल, फल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

प्राचीन शिव मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

बस्तर क्षेत्र प्राचीन काल से ही शिव उपासना और सनातन परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। क्षेत्र में मौजूद प्राचीन मंदिरों, शिवलिंगों और शिलालेखों में इसकी ऐतिहासिक एवं धार्मिक परंपराओं के प्रमाण मिलते हैं।

बस्तर स्थित प्राचीन शिव मंदिर को 10वीं शताब्दी के कालखंड से जुड़ा माना जाता है और इसका संबंध तत्कालीन छिंदक नागवंशी शासकों के काल से बताया जाता है। मंदिर क्षेत्र में स्थित भानसागर जलाशय और प्राचीन शिवालय बस्तर की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मंदिर की द्वार शाखा को सातवीं-आठवीं सदी का बताया जाता है।

लोकमान्यता है कि मंदिर में पहुंचने वाले निःसंतान श्रद्धालुओं की मनोकामना भगवान भोलेनाथ पूरी करते हैं। श्रद्धालु यहां त्रिशूल और धातु निर्मित नाग भी अर्पित करते हैं। महाशिवरात्रि के अलावा माघ माह में यहां ‘गंगादई’ मेले का भी आयोजन होता है।

सनातन जागरण का माध्यम बनी कांवड़ यात्रा

विभाग संयोजक सिकंदर कश्यप ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल भगवान शिव के जलाभिषेक की धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और प्राचीन विरासत से नई पीढ़ी को जोड़ने का माध्यम भी है।

उन्होंने कहा कि पवित्र नदी से जल लेकर प्राचीन शिव मंदिर तक पहुंचने और भगवान शिव का जलाभिषेक करने की परंपरा श्रद्धालुओं में भक्ति के साथ सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता का भाव उत्पन्न करती है।

प्रखंड अध्यक्ष विवेक शुक्ला ने कहा कि यात्रा को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों, शिवभक्तों, समाजसेवियों और कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यात्रा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं का स्वागत कर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

कांवड़ यात्रा में विहिप जिला समरसता प्रमुख होमेश राठौर, प्रखंड मंत्री शंकर नाग, सह संयोजक चुम्मन कश्यप, जिला दुर्गावाहिनी आस्था गुप्ता सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और शिवभक्त उपस्थित रहे।

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