
जगदलपुर,7 अगस्त 2026
बस्तर के सरकारी स्कूलों में एकल शिक्षक शालाओं की बढ़ती संख्या और कार्यालयों में संलग्न शिक्षकों को लेकर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। इस मुद्दे को लेकर पूर्व जिला उपाध्यक्ष युवा कांग्रेस एवं आदिवासी नेता हेमंत कश्यप ने संभाग आयुक्त, कलेक्टर और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।
हेमंत कश्यप ने ज्ञापन में 25 जून 2026 को जारी शासन के निर्देशों का हवाला देते हुए मांग की कि गैर-शैक्षणिक कार्यों में संलग्न सभी शिक्षकों को तत्काल उनके मूल विद्यालयों में भेजा जाए। उनका कहना है कि कई स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि जब विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, तब शिक्षकों को विभिन्न दफ्तरों और विभागों में संलग्न रखना उचित नहीं है। शासन द्वारा संलग्नीकरण समाप्त करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं, इसलिए उनका पालन तत्काल सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
हेमंत कश्यप ने मांग की कि रिक्त और एकल शिक्षक शालाओं में प्राथमिकता के आधार पर शिक्षकों की पदस्थापना की जाए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बस्तर के बच्चों के शैक्षणिक अधिकारों की अनदेखी जारी रही तो जनहित में लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान देवनाथ ठाकुर, अमृत बघेल, मन्नू बघेल, विजय भारती, कृपालु बघेल, रामदास, किशोर, जोगेंद्र, रामचंद्र, एकादशी, सुनील बिसाई, चंद्रेश सोनी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।







