
जगदलपुर, 7 अगस्त 2026
बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के तोंगकोंगेरा निवासी प्रगतिशील किसान सुरेन्द्र देवांगन ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन की सहायता से भेड़ पालन को अपनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। आज यह व्यवसाय उनके परिवार की आर्थिक मजबूती का प्रमुख आधार बन चुका है।
आधुनिक प्रशिक्षण से मिली सफलता की राह
भेड़ पालन शुरू करने से पहले सुरेन्द्र देवांगन ने उत्तर प्रदेश के मथुरा में आधुनिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण पर लगभग 20 से 25 हजार रुपये खर्च हुए, लेकिन इससे मिले अनुभव ने उनके व्यवसाय की मजबूत नींव रखी।
28 लाख की परियोजना, 10 लाख की सब्सिडी
प्रशिक्षण के बाद उन्होंने पशुपालन विभाग के माध्यम से योजना के तहत आवेदन किया। लगभग 28 लाख रुपये की परियोजना में उन्हें 10 लाख रुपये की सब्सिडी मिली, जबकि शेष राशि के लिए 15 लाख रुपये का बैंक ऋण लिया। शुरुआत में उन्होंने 100 मादा और 5 नर सहित 105 भेड़ों से व्यवसाय शुरू किया, जो अब बढ़कर 135 से 136 भेड़ों तक पहुंच गया है।
भेड़ पालन से बढ़ी आय
बाजार की मांग के अनुसार नर भेड़ को 480 रुपये प्रति किलो और मादा भेड़ को 400 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। पिछले दो वर्षों में उन्होंने 3 लाख रुपये से अधिक की भेड़ों की बिक्री कर आय अर्जित की है।
वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया शेड
सुरेन्द्र ने अपनी 5 एकड़ भूमि में से 2,100 वर्गफीट क्षेत्र में आधुनिक और हवादार शेड बनाया है। भेड़ों की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए शेड को चार अलग-अलग हिस्सों में विभाजित किया गया है। साथ ही उन्होंने दो स्थानीय चरवाहों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है।
जैविक खेती से भी मिला लाभ
भेड़ों से मिलने वाली गोबर की खाद का उपयोग कर उन्होंने धान और मक्का की खेती में रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च काफी कम कर दिया है। इससे खेती की लागत घटी है और भूमि की उर्वरता भी बनी हुई है।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
आज बैंक की किश्तें और कर्मचारियों का भुगतान करने के बाद भी सुरेन्द्र देवांगन का परिवार सम्मानजनक जीवन जी रहा है। उनका मानना है कि ऋण पूरी तरह चुकाने के बाद यह व्यवसाय उन्हें और अधिक आर्थिक मजबूती देगा। उनकी सफलता की कहानी बस्तर के किसानों और युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।




