बैलाडीला खनन विवाद पर सियासत तेज, सांसद महेश कश्यप और मनीष कुंजाम आमने-सामने

बस्तर, 6 जुलाई 2026
बैलाडीला डिपॉजिट नंबर-4 में प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर चल रही पदयात्रा अब राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गई है। आंदोलन के बीच बस्तर सांसद महेश कश्यप और बस्तरिया राज मोर्चा के प्रमुख मनीष कुंजाम के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है।
सांसद महेश कश्यप ने आरोप लगाया कि जल, जंगल और जमीन के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पहले भी माओवादी संगठन और उनके समर्थक इसी तरह के मुद्दों का इस्तेमाल करते रहे हैं। सांसद ने आरोप लगाया कि बैलाडीला डिपॉजिट नंबर-4 के विरोध के पीछे जनहित नहीं, बल्कि निजी स्वार्थ हैं। उन्होंने बचेली से सुकमा तक प्रस्तावित स्लरी पाइपलाइन के विरोध का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि आंदोलन बाद में पैसों के बदले समाप्त कर दिया गया। साथ ही उन्होंने सड़क और रेलवे जैसी विकास परियोजनाओं का लगातार विरोध किए जाने की भी बात कही।
वहीं, मनीष कुंजाम ने सांसद के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या संगठन का नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासियों के अस्तित्व, जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संघर्ष है। उन्होंने कहा कि बस्तरिया राज मोर्चा से जुड़े लोग बिकने वाले नहीं हैं और उन्हें पैसों से नहीं खरीदा जा सकता। कुंजाम ने कहा कि बस्तर में प्राकृतिक संसाधनों और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए वर्षों से आंदोलन होते रहे हैं और सांसद को इस इतिहास की जानकारी लेनी चाहिए।
गौरतलब है कि बैलाडीला खनन परियोजना को लेकर सरकार इसे विकास और रोजगार से जोड़ रही है, जबकि आदिवासी संगठन इसे जल, जंगल और जमीन पर अधिकार की लड़ाई बता रहे हैं। आंदोलन के बीच तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहता है या समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल सामने आती है।




