
नारायणपुर, 3 जुलाई 2026
वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वनमण्डल नारायणपुर के असीमांकित वन क्षेत्रों में ‘वन मित्र’ पहल के तहत स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवाओं को वन संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पहल से जहां युवाओं को सम्मानजनक रोजगार मिला है, वहीं अबुझमाड़ के संवेदनशील वन क्षेत्रों में अवैध कटाई, अवैध उत्खनन, अवैध परिवहन और अतिक्रमण जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वनों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्थानीय समाज की भागीदारी से ही इसे स्थायी रूप से मजबूत बनाया जा सकता है। इसी सोच के साथ अबुझमाड़ के युवाओं को वन संरक्षण अभियान से जोड़कर रोजगार और पर्यावरण संरक्षण दोनों को बढ़ावा दिया गया है।
वन विभाग के अनुसार, 31 मार्च 2026 के बाद क्षेत्र में सामान्य स्थिति बनने और लोगों की आवाजाही बढ़ने के साथ कुछ स्थानों पर अवैध कटाई तथा वन भूमि पर दबाव बढ़ने लगा था। इस चुनौती से निपटने के लिए स्थानीय युवाओं को ‘वन मित्र’ के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया गया।
वर्तमान में लोडागोटा, कुड़मेल, करांगुर, धोबे, कुतुल, फरसबेड़ा, पदमकोट, कोड़ेनार, नेलांगुर, नेड़नार, कस्तुरमेटा, मोहंदी, कच्चापाल, ईरकभट्टी, बेचा, सरगीपाल, गोंगला, छिंदपदर, होरादि, बिनागुण्डा और छिंदपुर सहित विभिन्न ग्रामों के 29 स्थानीय युवा वन मित्र के रूप में कार्यरत हैं। इन्हें करीब 2 लाख 69 हजार 681 हेक्टेयर असीमांकित वन क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वन विभाग द्वारा वन मित्रों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे वन संरक्षण, अवैध गतिविधियों की रोकथाम और जनजागरूकता से जुड़े कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित कर सकें। वन मित्र ग्रामीणों को बैठकों और मुनादी के माध्यम से वन संरक्षण तथा लघु वनोपज के सतत संग्रहण के प्रति भी जागरूक कर रहे हैं।
वन मित्रों को छह दलों में विभाजित कर बेडमाकोटि, परियादी, कोहकामेटा, ओरछा, होरादि और आकाबेड़ा प्रस्तावित असीमांकित परिक्षेत्रों में तैनात किया गया है। ये दल नियमित निगरानी कर अवैध कटाई, अवैध परिवहन, अवैध उत्खनन और अतिक्रमण पर नियंत्रण में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि स्थानीय युवाओं की भागीदारी पर आधारित यह ‘वन मित्र’ मॉडल भविष्य में प्रदेश के अन्य वन क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायी साबित होगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण, जनभागीदारी और रोजगार सृजन को एक साथ आगे बढ़ाते हुए अबुझमाड़ में विकास और संरक्षण का नया अध्याय लिख रही है।




