
बस्तर, 11 जून 2026
ग्राम पंचायत चपका में मेसर्स गोपाल स्पंज एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित आयरन उद्योग के खिलाफ किसान और आदिवासी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को आयोजित विरोध सभा के बाद भारतीय किसान यूनियन और छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने बस्तर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर उद्योग स्थापना पर रोक लगाने की मांग की।
विरोध प्रदर्शन में राजाराम तोड़ेम, दशरथ कश्यप, लखेश्वर कश्यप, अरविंद नेताम, सरपंच शकुन्तला कश्यप, बबलू बघेल सहित जनप्रतिनिधि, किसान संगठन, इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।


किसानों की जमीन वापस दिलाने की मांग
ज्ञापन में भूमिहीन किसानों को आवंटित 16.37 हेक्टेयर भूमि (खसरा नंबर 162/1 से 162/28) वापस दिलाने की मांग की गई है। संगठनों का आरोप है कि कंपनी ने बिना ग्रामसभा की सहमति के उक्त भूमि पर कब्जा कर चारदीवारी का निर्माण कर लिया है, जिससे पट्टाधारी किसान अपनी जमीन पर खेती नहीं कर पा रहे हैं।
PESA कानून और पांचवीं अनुसूची के उल्लंघन का आरोप
आदिवासी समाज ने इस मामले को पांचवीं अनुसूची और पेसा अधिनियम (PESA) 1996 का उल्लंघन बताया है। संगठनों का कहना है कि चपका क्षेत्र मार्कण्डेय नदी तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर है, जिसे संविधान की धारा 244(1) के तहत संरक्षित किया जाना चाहिए।
किसानों की अन्य मांगें भी दोहराईं
संगठनों ने याद दिलाया कि 1 अप्रैल को इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति द्वारा खाद, बीज और डीजल की उपलब्धता, कालाबाजारी पर रोक, धान का MSP 2400 रुपये प्रति क्विंटल, बोरवेल सुविधा, बोधघाट परियोजना पर रोक तथा कृषि विभाग में भर्ती सहित नौ सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था।
भारतीय किसान यूनियन ने खाद वितरण में कटौती नहीं करने, किसानों को डब्बा और जरकिन में डीजल उपलब्ध कराने तथा बस्तर में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने की मांग दोहराई।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने वर्ष 2021 के कोविड प्रकरण और अप्रैल 2026 के डंडजात्रा मामले वापस लेने की मांग भी रखी। सभी संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसानों की जमीन, अधिकारों और आस्था का सम्मान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा।




