स्वास्थ्य विभाग की 100 करोड़ की निविदा पर उठे सवाल, मैनपावर टेंडर में अनियमितता के आरोप

रायपुर, 22 मई 2026। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा जारी लगभग 100 करोड़ रुपये की मैनपावर सप्लाई निविदा अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। स्थानीय एजेंसियों और व्यापारिक संगठनों ने टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितता, पक्षपात और “मैच फिक्सिंग” जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि निविदा की शर्तें इस प्रकार तैयार की गईं, जिससे एक विशेष कंपनी को लाभ पहुंचे और स्थानीय सेवा प्रदाताओं को बाहर किया जा सके।
सबसे अधिक विवाद Earnest Money Deposit (EMD) को लेकर खड़ा हुआ है। करीब 100 करोड़ रुपये की निविदा में मात्र 6 लाख रुपये की EMD राशि निर्धारित किए जाने पर कई सवाल उठ रहे हैं। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि इतनी बड़ी निविदा के लिए इतनी कम EMD सामान्य सरकारी प्रक्रिया और वित्तीय मानकों के विपरीत है। आरोप लगाया गया है कि यह व्यवस्था किसी विशेष एजेंसी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई।
निविदा में सुरक्षा गार्ड, सफाई कर्मी, कंप्यूटर ऑपरेटर, ड्राइवर, फिटर और तकनीकी स्टाफ जैसी विभिन्न सेवाओं को एक ही टेंडर में शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। स्थानीय सेवा प्रदाताओं का कहना है कि पहले इन सेवाओं के लिए अलग-अलग निविदाएं जारी होती थीं, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के ठेकेदार भी भागीदारी कर पाते थे। अब सभी सेवाओं को एक साथ जोड़ दिए जाने से छोटे एजेंसियों के लिए पात्रता हासिल करना लगभग असंभव हो गया है।
टेंडर में रखी गई पात्रता शर्तों को भी विवाद का कारण बताया जा रहा है। निविदा में न्यूनतम 300 मैनपावर का अनुभव, 10 करोड़ रुपये का एकल वर्क ऑर्डर और 100 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर जैसी शर्तें रखी गई हैं। स्थानीय एजेंसियों का दावा है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग में कभी इतने बड़े एकल कार्यादेश जारी ही नहीं हुए, ऐसे में यह शर्तें केवल बड़ी बाहरी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तय की गई हैं।
इसके साथ ही स्थानीय सेवा प्रदाताओं ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार के निर्देशों के बावजूद इस निविदा को Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल पर पर्याप्त रूप से प्रदर्शित नहीं किया गया। साथ ही टेंडर का व्यापक प्रचार-प्रसार भी नहीं किया गया, जिससे कई एजेंसियों को समय पर जानकारी नहीं मिल सकी।
मामले को लेकर विभिन्न व्यापारिक संगठनों और सेवा प्रदाताओं ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने EMD निर्धारण, पात्रता शर्तों, GeM पोर्टल के उपयोग और पूरी निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए चिकित्सा शिक्षा संचालक Dr. U.S. Pakra ने कहा कि टेंडर को लेकर कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया GeM पोर्टल के माध्यम से शुरू की गई थी, लेकिन फिलहाल टेंडर को हटा दिया गया है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।




