पति की लंबी उम्र की कामना में सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत, दंतेवाड़ा के चितालूर में श्रद्धा से मनाया वट सावित्री पर्व

जगदलपुर, 17 मई 2026। बस्तर संभाग सहित दंतेवाड़ा जिले के चितालूर क्षेत्र में शनिवार को वट सावित्री पर्व श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा और विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की।
सुबह से ही महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर बरगद के पेड़ के नीचे एकत्रित हुईं। उन्होंने वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा की तथा सावित्री-सत्यवान की कथा श्रवण किया। पूजा के दौरान महिलाओं ने बरगद की जड़ में जल, सिंदूर, अक्षत, फल और फूल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन माता सावित्री ने अपने अटल संकल्प और बुद्धिमत्ता से यमराज को प्रसन्न कर पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी परंपरा के प्रतीक स्वरूप विवाहित महिलाएं हर वर्ष वट सावित्री व्रत रखती हैं।
मान्यता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है। इसकी विशालता, लंबी आयु और गहरी जड़ें पति-पत्नी के अटूट रिश्ते और स्थायी दांपत्य जीवन का प्रतीक मानी जाती हैं।
स्थानीय मंदिरों और घरों में भी सावित्री-सत्यवान कथा का आयोजन किया गया। शाम को पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं ने जल ग्रहण कर व्रत खोला। दंतेवाड़ा के चितालूर में हर वर्ष की तरह इस बार भी वट सावित्री पर्व को लेकर सुहागिनों में विशेष उत्साह देखने को मिला।




