
जगदलपुर, 14 मई 2026। कभी नक्सलवाद की पहचान से जाने जाने वाले बस्तर की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। केंद्र और राज्य सरकार की नई रणनीति के तहत अब बस्तर के सुरक्षा कैंप केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें विकास और जनसेवा के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
नई योजना के तहत फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) यानी सुरक्षा कैंप स्थानीय ग्रामीणों और सुरक्षाबलों के बीच सेतु का काम करेंगे। इस पहल की शुरुआत देश के गृह मंत्री अमित शाह नेतनार स्थित सीआरपीएफ कैंप से करने जा रहे हैं।
ग्रामीणों को मिलेंगी कई सुविधाएं
बस्तर संभाग के सुरक्षा कैंपों में अब 3 से 4 बैरकों को जन समस्या निवारण और जन सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां ग्रामीणों को डिजिटल सेवा केंद्र, युवाओं को स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग और जंगल आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस प्रोसेसिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इस नई व्यवस्था में एक ओर जहां सुरक्षा बल तैनात रहेंगे, वहीं दूसरी ओर विकास और जनसेवा की गतिविधियां भी संचालित होंगी।
नक्सल गतिविधियों में आई कमी
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि क्षेत्र में नक्सल गतिविधियां लगभग समाप्ति की ओर हैं। ऐसे में सुरक्षा कैंपों के कुछ हिस्सों का उपयोग अब जनता की मूलभूत सुविधाओं के लिए करने की योजना बनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवा केंद्र, स्किल डेवलपमेंट और वन उत्पाद प्रसंस्करण जैसी योजनाओं की रूपरेखा तैयार की जा रही है। योजना को अंतिम रूप मिलने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
सरकार की इस पहल को बस्तर में सुरक्षा के साथ-साथ विकास और विश्वास बढ़ाने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।




