रफ्तार और शक्ति का महासंग्राम: बस्तर में चमके देशभर के जनजातीय एथलीट, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में पदकों की बरसात

डमरू कश्यप
जगदलपुर,रायपुर, 03 अप्रैल 2026। बस्तर की पावन धरा जगदलपुर के धरमपुरा स्थित आधुनिक क्रीड़ा परिसर में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं का समापन बेहद रोमांचक रहा। अंतिम दिन ट्रैक और फील्ड पर रफ्तार, शक्ति और अटूट संकल्प का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां देशभर से आए जनजातीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक अपने नाम किए।
पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में नागालैंड के वेडे टमेरो ने 32:28.46 के शानदार समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। महाराष्ट्र के कमलाकर लक्ष्मण देशमुख ने रजत और जम्मू-कश्मीर के हंस राज ने कांस्य पदक हासिल किया। महिला वर्ग में पश्चिम बंगाल की संजीता ओरांव ने 40:21.18 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि ओडिशा की संध्या मुर्मू और मेघालय की बलारिशा थिरनियांग क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहीं।
लघु दूरी की स्पर्धाओं में भी खिलाड़ियों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। पुरुषों की 200 मीटर दौड़ में झारखंड के शिव कुमार सोरेन ने 21.51 सेकंड के रिकॉर्ड समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। असम के अर्पण ताई और राजस्थान के जगदीश मीणा ने रजत और कांस्य पदक प्राप्त किए। महिला वर्ग में कर्नाटक की ऋतुश्री ने 25.87 सेकंड में दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
1500 मीटर दौड़ में भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला। महिला वर्ग में कर्नाटक की नागिनी ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि पुरुष वर्ग में झारखंड के राहुल उरांव ने पहला स्थान हासिल किया। मेजबान छत्तीसगढ़ के मनीष कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया।
भाला फेंक स्पर्धा में मध्य प्रदेश के गुलाब सिंह ने 62.80 मीटर की दूरी तय कर स्वर्ण पदक जीता। असम के प्रमोद हागजेर को रजत पदक मिला। रिले दौड़ में भी टीमों ने बेहतरीन तालमेल दिखाया। महिला 4×400 मीटर रिले में झारखंड की टीम ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि पुरुष वर्ग में ओडिशा की टीम विजेता रही। छत्तीसगढ़ की पुरुष टीम ने रजत पदक हासिल किया।
महिला लंबी कूद में झारखंड की प्रीति लकड़ा ने 5.54 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
केंद्रीय खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित यह महाकुंभ न केवल पदक तालिका में प्रतिस्पर्धा को रोमांचक बना रहा है, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों की छिपी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच भी प्रदान कर रहा है। बस्तर की धरती पर आयोजित यह आयोजन खेल इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है।




