छत्तीसगढ़

देश में नंबर-1 बना छत्तीसगढ़: मातृत्व वंदना योजना में शिकायतों का तेज निराकरण और मंजूरी पर फोकस, गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता से सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा

रायपुर, 17 मार्च 2026। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना को लाभार्थियों तक पहुंचाने में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल रहा है। इससे एक बार फिर साबित हुआ है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार न सिर्फ जनकल्याणकारी योजनाओं को तेजी से अमल में लाती है, बल्कि प्रशासनिक सक्रियता के साथ उन्हें हर तबके तक समय पर पहुंचाने का वादा भी पूरा करती है।

गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रोत्साहित करने वाली इस केंद्रीय योजना के तेज क्रियान्वयन और शिकायतों के त्वरित निपटान के कारण छत्तीसगढ़ ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। यह केवल एक सरकारी योजना का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर पर्यवेक्षक, परियोजना अधिकारी और राज्य स्तर के अधिकारियों के सेवा, समर्पण और दृढ़ निश्चय का परिणाम है।

जच्चा-बच्चा का स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थान इसी दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

ऐसे मिली उपलब्धि

प्रशासनिक अमले द्वारा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लगातार मॉनिटरिंग की गई और लाभार्थियों के पंजीयन पर विशेष फोकस किया गया। वर्ष 2023-24 में जहां 1,75,797 गर्भवती महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 2,19,012 हो गई। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 2,04,138 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया, जो लक्ष्य का 93.3 प्रतिशत है।

रजिस्ट्रेशन के बाद आवेदनों को तुरंत मंजूरी देने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। तय प्रक्रिया के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा फार्म भरने, पर्यवेक्षक द्वारा सत्यापन और परियोजना अधिकारी व राज्य स्तर पर मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाई गई। भरे गए आवेदनों में से 83 प्रतिशत का परीक्षण कर भुगतान के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्र से छत्तीसगढ़ को मिली स्वीकृति दर भी सबसे अधिक 83.87 प्रतिशत रही है।

इसके अलावा शिकायतों के निराकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। लाभार्थियों की अधिकांश शिकायतें भुगतान न होने से जुड़ी थीं, जिनका तेजी से समाधान किया गया। राज्य सरकार ने सभी शिकायतों का निराकरण कर दिया, हालांकि केंद्र के आंकड़ों में 30 दिन से अधिक लंबित शिकायतें 7 प्रतिशत दर्ज हैं। इसके बावजूद 93 प्रतिशत शिकायतों का समाधान कर छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर रहा।

यदि तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत कुल 5,98,947 गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया, जिनमें से 5,40,624 को स्वीकृति मिल चुकी है।

गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान और उससे पहले पौष्टिक आहार व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार इस योजना के तहत 5,000 रुपये तथा दूसरी बेटी के जन्म पर एकमुश्त 6,000 रुपये देती है। यह राशि तीन किस्तों में दी जाती है—रजिस्ट्रेशन के समय 1,000 रुपये, छह माह बाद 2,000 रुपये और बच्चे के जन्म, पंजीकरण तथा टीकाकरण के बाद 2,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। इसका उद्देश्य संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और शिशु मृत्यु दर को कम करना है।

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