नेपाल में बाढ़ के बाद एक और बड़ा खतरा! हिमखंड टूटने की आशंका, चीन ने दी चेतावनी

काठमांडू,2 सितंबर 2026
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब एक और संभावित खतरे ने सरकार और स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। चीन ने चेतावनी दी है कि छोचेन नदी में बने इम्पैक्ट क्रेटर के आसपास मौजूद हिम चट्टानों और बड़े हिमखंडों के टूटने का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। इनके टूटने से अचानक बड़े पैमाने पर बाढ़ जैसी गंभीर आपदा पैदा हो सकती है।
चीन ने नेपाल को दी अहम चेतावनी
चीनी सरकारी मीडिया सीसीटीवी न्यूज ने चीन के जल संसाधन मंत्रालय के हवाले से बताया कि दक्षिण-पश्चिम चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग (केरुंग) काउंटी में मलबे वाली बाढ़ के बाद संभावित जोखिमों की लगातार निगरानी की जा रही है।
रिमोट-सेंसिंग तस्वीरों के तुलनात्मक अध्ययन में ग्यिरोंग त्सांगपो नदी बेसिन में पहले से चिन्हित 14 हिमतालों के जलस्तर वाले क्षेत्रों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं मिला है। फिलहाल सभी हिमताल स्थिर बताए गए हैं।
ड्रोन सर्वे में क्या सामने आया?
नेपाली समयानुसार मंगलवार सुबह 5:45 बजे किए गए ड्रोन सर्वे में पता चला कि छोचेन नदी के इम्पैक्ट क्रेटर में जमा अधिकांश पानी बह चुका है। इसके बाद निचले इलाकों में नदी का बहाव भी सामान्य स्थिति में लौट आया है।
हालांकि, इसके बावजूद खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार इम्पैक्ट क्रेटर के आसपास हिमनद या बड़े हिमखंडों के टूटने की आशंका बनी हुई है। यदि ये अचानक टूटते हैं तो निचले इलाकों में अचानक बाढ़ और भारी तबाही की स्थिति पैदा हो सकती है।
चीन के जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट को चीनी दूतावास ने नेपाल के मौसम विभाग और बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा के साथ साझा किया है।
नेपाल में बाढ़ से 1003 लोगों की मौत
इस बीच नेपाल में आई भीषण बाढ़ से मृतकों की संख्या 1003 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। राहत और खोज अभियान अभी भी जारी है और अधिकारियों को मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है।
शव नंबर 1003 की पहचान बनी चुनौती
पोखरा के एक सरकारी अस्पताल में रखे शव नंबर 1003 की पहचान को लेकर तीन परिवारों ने दावा किया है। तीनों परिवारों का कहना है कि अस्पताल में रखा शव उनके उस परिजन का है, जो बाढ़ के बाद से लापता है।
अब प्रशासन के सामने शव की सही पहचान करने की चुनौती है। इसके लिए डीएनए जांच या अन्य वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लिया जा सकता है।
नेपाल में एक ओर जहां बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है, वहीं दूसरी ओर संभावित हिमखंड टूटने की चेतावनी ने प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।




