पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा तनाव, बाड़ लगाने के फैसले पर बांग्लादेश की तीखी प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य के नए मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में अवैध घुसपैठ रोकने के लिए सीमा पर बाड़ लगाने का निर्णय लिया है। इसके तहत राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) को 600 एकड़ से ज्यादा जमीन हस्तांतरित करने का आदेश दिया है।
इस फैसले पर बांग्लादेश की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री सलाहकार M Humayun Kabir ने कहा कि “बांग्लादेश कांटेदार तारों से नहीं डरता” और यदि सीमा पर हत्याएं जारी रहीं तो उनका देश चुप नहीं बैठेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत का रास्ता जारी रहेगा।
“सीमा सुरक्षा में मानवीय दृष्टिकोण जरूरी”
विदेश मंत्रालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कबीर ने कहा कि दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संबंध मजबूत करने के लिए सीमा सुरक्षा के मुद्दों पर मानवीय नजरिया अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जहां बातचीत की जरूरत होगी, वहां बांग्लादेश बातचीत करेगा।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं के बयानों को चुनावी बयानबाजी बताते हुए कहा कि बांग्लादेश भारत की आंतरिक राजनीति में दखल नहीं देना चाहता और उसका संबंध केंद्र सरकार से है।
850 किलोमीटर सीमा पर अभी नहीं लगी बाड़
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को जानकारी दी थी कि अगले 45 दिनों के भीतर BSF को जमीन हस्तांतरित कर दी जाएगी ताकि सीमा पर बाड़ लगाने का काम तेज किया जा सके।
भारत और बांग्लादेश के बीच पश्चिम बंगाल में करीब 4,097 किलोमीटर लंबी सीमा है। इसमें अब तक लगभग 3,240 किलोमीटर हिस्से में बाड़ लग चुकी है, जबकि करीब 850 किलोमीटर क्षेत्र अब भी खुला है। इनमें लगभग 175 किलोमीटर हिस्सा दुर्गम भूभाग में आता है, जहां बाड़ लगाना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
सीमा पर सुरक्षा और राजनीति दोनों अहम
सीमा पर अवैध घुसपैठ, तस्करी और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक और कूटनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं। पश्चिम बंगाल सरकार का यह कदम सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है, वहीं बांग्लादेश की प्रतिक्रिया से दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।




