
जगदलपुर, 21 अगस्त 2026
किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिला अस्पताल स्थित शहीद गुंडाधुर प्रेरणा भवन में जिले के सभी विकासखंडों से आए नोडल शिक्षकों के लिए एक दिवसीय संवेदनशील प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को एचआईवी-एड्स के संबंध में प्रामाणिक और वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना था, ताकि वे विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को सही मार्गदर्शन दे सकें और समाज में व्याप्त भ्रांतियों, भय एवं भेदभाव को दूर करने में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि एचआईवी मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संपर्क, संक्रमित सुई या सिरिंज के साझा उपयोग, संक्रमित रक्त चढ़ाने तथा संक्रमित मां से बच्चे में गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान फैल सकता है। इन जोखिमों से बचाव के लिए सुरक्षित व्यवहार, नई सुई-सिरिंज का उपयोग, जांचे गए रक्त उत्पादों का इस्तेमाल तथा गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच और उपचार को आवश्यक बताया गया।
कार्यशाला में यह भ्रांति भी दूर की गई कि एचआईवी हाथ मिलाने, गले मिलने, साथ खाने-पढ़ने या सामान्य सामाजिक संपर्क से नहीं फैलता। इसलिए एचआईवी से प्रभावित व्यक्तियों से दूरी बनाना या उनके साथ किसी प्रकार का सामाजिक भेदभाव करना पूरी तरह निराधार है।
प्रतिभागियों को एचआईवी एवं एड्स (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 2017 के कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। अधिनियम के तहत शिक्षा, रोजगार, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं में एचआईवी प्रभावित व्यक्तियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव प्रतिबंधित है। साथ ही व्यक्ति की मेडिकल स्थिति की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है।
नियमों का उल्लंघन करने या किसी व्यक्ति की गोपनीय स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को अनुचित तरीके से उजागर करने पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
कार्यशाला में स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी देते हुए आईसीटीसी केंद्रों की भूमिका पर भी चर्चा की गई, जहां पूर्ण गोपनीयता के साथ निःशुल्क परामर्श और एचआईवी जांच की सुविधा उपलब्ध है।
विशेषज्ञों ने एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि नियमित रूप से दवा लेने से शरीर में वायरस की सक्रियता को नियंत्रित किया जा सकता है और एचआईवी के साथ व्यक्ति स्वस्थ एवं सामान्य जीवन जी सकता है। NACO के तहत उपचार और संबंधित जांचें निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।
शिक्षा विभाग के समन्वय से आयोजित यह प्रशिक्षण संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं बस्तर संभाग डॉ. महेश सांडिया, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक तथा जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सी. मैत्री के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में क्लस्टर प्रोग्राम मैनेजर डॉ. दीक्षा सिंह, काउंसलर मुकुंद दीवान, डीएमडी डॉ. शैलेन्द्र यादव, जिला डाटा मैनेजर गिरीश धनकर, गौरव पांडे सहित संबंधित अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नोडल शिक्षक उपस्थित रहे।




