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Bastar news update:बस्तर में किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती, चावल ATM से मिलेगा राशन, लिफ्ट के कारण स्टेशन उद्घाटन अटका

बस्तर, 31 अक्टूबर 2026

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में इन दिनों किसानों से लेकर आम नागरिकों तक कई तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। चक्रवाती तूफान के असर से खेतों में कटी धान की फसल को बचाना किसानों के लिए चुनौती बन गया है। वहीं जगदलपुर में जल्द ही चावल ATM की सुविधा शुरू होने की तैयारी है। दूसरी ओर रेलवे स्टेशन के नए भवन का उद्घाटन लिफ्ट निर्माण में देरी के कारण अटका हुआ है। इसके अलावा किरंदुल की सड़क पर फैले कीचड़ और कोंडागांव के स्कूल में अवैध बिजली कनेक्शन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

1. किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती, खेतों में कटी धान की फसल खराब होने का डर

बस्तर। चक्रवाती तूफान का खतरा फिलहाल टलता नजर आ रहा है, लेकिन इसका असर किसानों की चिंता के रूप में अब भी दिखाई दे रहा है। तेज हवाओं और बारिश के बाद खेतों में कटी पड़ी धान की फसल किसानों के लिए नई मुसीबत बन गई है।

कई जगह खेतों में पानी भरा होने और जमीन गीली रहने के कारण धान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। मौसम खुलने के बावजूद किसान अपनी उपज समेटने की स्थिति में नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में खेतों में पड़ी फसल को दोबारा बारिश और नमी से बचाने के लिए किसान तिरपाल का सहारा ले रहे हैं।

किसानों को सबसे ज्यादा डर धान की गुणवत्ता खराब होने और उपज के सड़ने का है। लंबे समय तक गीली जमीन पर फसल पड़ी रहने से नुकसान की आशंका बढ़ गई है। जिन किसानों ने कटाई पूरी कर ली है, उनके सामने अब उपज को सुरक्षित रखने की चुनौती है।

वहीं खेतों में पानी और कीचड़ के कारण धान समेटने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। किसान अब खेत सूखने और मौसम पूरी तरह साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।

2. अब ATM से निकलेगा चावल, जगदलपुर में जल्द मिलेगी नई सुविधा

जगदलपुर। राशन लेने के लिए अब उचित मूल्य की दुकान खुलने का इंतजार और लंबी कतारों में खड़े रहने की मजबूरी खत्म करने की तैयारी है। जगदलपुर शहर में जल्द ही जिले का पहला अन्नपूर्ति ग्रीन ATM स्थापित किया जा सकता है।

इस व्यवस्था के शुरू होने से राशनकार्डधारी अपनी सुविधा के अनुसार दिन या रात किसी भी समय चावल प्राप्त कर सकेंगे।

नगर निगम क्षेत्र के सभी 48 वार्डों के करीब 31 हजार 200 राशनकार्डधारियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि वन नेशन-वन राशनकार्ड योजना के तहत जिले के किसी भी क्षेत्र का पात्र हितग्राही इस मशीन से चावल ले सकेगा।

इसके लिए हितग्राही को राशनकार्ड नंबर दर्ज करने के बाद अंगूठे से बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा। पात्रता की पुष्टि होते ही निर्धारित मात्रा में चावल मशीन से बाहर आ जाएगा।

खाद्य विभाग ने लालबाग और दीनदयाल उपाध्याय वार्ड में दो संभावित स्थान चिह्नित किए हैं। अब विश्व खाद्य कार्यक्रम की टीम इन स्थानों का निरीक्षण कर उपयुक्त जगह का चयन करेगी।

मशीन के संचालन की जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूह को दी जाएगी। वहीं ऑपरेटर और चौकीदार की दो शिफ्ट में व्यवस्था रहेगी। हालांकि, इस सुविधा का लाभ कब से मिलना शुरू होगा, यह निरीक्षण और स्थापना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

3. लिफ्ट निर्माण में देरी से रुका जगदलपुर रेलवे स्टेशन भवन का उद्घाटन

जगदलपुर। रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन एक अधूरी सुविधा पूरे स्टेशन के उद्घाटन में बाधा बनी हुई है।

अमृत स्टेशन योजना के तहत करीब 26 करोड़ रुपये की लागत से जगदलपुर रेलवे स्टेशन का कायाकल्प किया गया है। नया स्टेशन भवन, विशाल फुटओवर ब्रिज और प्लेटफार्मों का विस्तार जैसे कई काम पूरे किए जा चुके हैं।

प्लेटफार्म की लंबाई बढ़ाकर 530 मीटर तक कर दी गई है। वहीं 11 नए प्लेटफार्म शेड भी तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही यात्रियों की सुविधा के लिए चार लिफ्ट लगाने की योजना बनाई गई थी।

लेकिन लिफ्ट निर्माण में देरी के चलते स्टेशन भवन का उद्घाटन लगातार टलता रहा है। 15 अगस्त और बस्तर दशहरा के आसपास उद्घाटन की चर्चाएं थीं, लेकिन यात्रियों को अब तक इसका लाभ नहीं मिल सका।

बताया जा रहा है कि पहले जिम्मेदारी संभाल रही एजेंसी समय पर काम पूरा नहीं कर पाई। अब लिफ्ट लगाने के लिए दूसरी एजेंसी को जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

उधर, केके रेललाइन पर भूस्खलन के कारण रेल परिवहन प्रभावित होने से भी स्टेशन की शुरुआत की योजना पर असर पड़ा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के बावजूद यात्रियों को जरूरी सुविधाओं के लिए आखिर कितना और इंतजार करना पड़ेगा।

4. सड़क पर फैले कीचड़ ने बढ़ाई परेशानी, दोपहिया वाहन चालकों को हादसे का खतरा

किरंदुल। सड़क पर फैली लाल मिट्टी वाहन चालकों के लिए खतरे का कारण बन गई है। किरंदुल में इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के पास मुख्य सड़क पर जमा चिकनी मिट्टी बारिश के बाद फिसलन भरे कीचड़ में बदल जाती है।

इसका सबसे ज्यादा खतरा दोपहिया वाहन चालकों को उठाना पड़ रहा है। जरा सी लापरवाही या अचानक ब्रेक लगाने पर वाहन फिसलने की आशंका बनी रहती है।

बताया जा रहा है कि पास स्थित बैलोअप के सर्विस वर्कशॉप में लौह अयस्क डंप किया जाता है। इसके लिए 10 पहिया हाइवा वाहनों की लगातार आवाजाही होती है। वर्कशॉप परिसर में जमा लाल मिट्टी बारिश के पानी के साथ बहकर मुख्य सड़क तक पहुंच जाती है।

नतीजा यह है कि सड़क पर चलने वाले आम नागरिकों को हर दिन इस फिसलन से जूझना पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर इस मार्ग पर पहले भी छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होने की बात सामने आई है।

हैरानी की बात यह है कि इसी रास्ते से संबंधित संस्थान के अधिकारी और कर्मचारी भी रोज गुजरते हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। अब लोगों को सड़क की सफाई और मिट्टी के फैलाव को रोकने के लिए उचित व्यवस्था का इंतजार है।

5. नए स्कूल भवन में बिजली की हुकिंग, बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल

कोंडागांव। सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं देने के दावों के बीच चिलपुटी के नए हायर सेकेंडरी स्कूल भवन की बिजली व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है।

जानकारी के मुताबिक भवन निर्माण पूरा होने के बाद भी विद्युत विभाग से वैध बिजली कनेक्शन नहीं लिया गया है। इसके बावजूद यहां सीधे तार जोड़कर यानी हुकिंग के जरिए बिजली का उपयोग किया जा रहा है।

बिना अधिकृत कनेक्शन के इस तरह बिजली इस्तेमाल करना विद्यार्थियों और स्कूल स्टाफ की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। असुरक्षित तारों और कनेक्शन से शॉर्ट सर्किट या करंट लगने जैसी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग, बिजली विभाग और लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल उठने लगे हैं।

लोक निर्माण विभाग की ईई आशा मंडावी का कहना है कि भवन निर्माण पूरा कराया गया है और बिजली की व्यवस्था शिक्षा विभाग को करनी चाहिए।

वहीं डीईओ भारती प्रधान ने हुकिंग की जानकारी से अनभिज्ञता जताते हुए इसे निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी बताया है।

दूसरी ओर बिजली विभाग के जेई विजेंद्र शार्दूल के मुताबिक स्कूल का कनेक्शन अभी नहीं हुआ है, हालांकि इसके लिए डिमांड पहले ही भेजा जा चुका है।

तीनों विभागों के अलग-अलग बयानों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर स्कूल में हुकिंग किसने की और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

अब जरूरी है कि मौके की जांच कर अवैध कनेक्शन हटाया जाए और विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए तत्काल वैध बिजली कनेक्शन सुनिश्चित किया जाए।

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