Bastar news:बस्तर में केके रेल लाइन से लेकर किसानों की चिंता तक, SIR अभियान और बस्तर दशहरा समेत पढ़ें 6 बड़ी खबरें

बस्तर,26 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में इन दिनों रेल यातायात, मौसम, किसानों और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी कई अहम खबरें सामने आई हैं। केके रेल लाइन पर यात्री ट्रेनों का परिचालन फिलहाल बंद है, वहीं संभावित चक्रवाती तूफान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा बस्तर दशहरा का समापन, रावघाट परियोजना के कर्मचारियों की हड़ताल, मतदाता सूची पुनरीक्षण पर कांग्रेस का अभियान और ओडिशा में बाढ़ के खतरे को देखते हुए जलद्वार खोलने की कार्रवाई भी चर्चा में है।
1. केके रेल लाइन पर यात्रियों का इंतजार बढ़ा
बस्तर में रेल कनेक्टिविटी बहाल होने का इंतजार कर रहे यात्रियों को फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही है। मल्लीगुड़ा और जरति स्टेशनों के बीच भूस्खलन के कारण 25 सितंबर से यात्री रेल सेवाएं बंद हैं। पहले 30 अक्टूबर से ट्रेनों का परिचालन शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन संभावित चक्रवाती तूफान के चलते अब 10 नवंबर तक सेवाएं स्थगित रहने की खबर है।
रेलवे ने मरम्मत कार्य के लिए 800 से अधिक मजदूरों और 80 से ज्यादा मशीनों को तैनात किया था। इस बीच मालगाड़ियों की आवाजाही शुरू हो गई है और पिछले तीन दिनों में लौह अयस्क से लदी 15 मालगाड़ियां चलाई गई हैं।
यात्री ट्रेनों का परिचालन बंद होने से जगदलपुर से हावड़ा, राउरकेला, भुवनेश्वर और विशाखापट्टनम जाने वाले यात्रियों को परेशानी हो रही है। इन ट्रेनों से प्रतिदिन करीब 2 हजार यात्री सफर करते थे। अब यात्रियों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
2. खेतों में धान तैयार, तूफान के खतरे से किसानों की बढ़ी चिंता
बस्तर में किसानों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पहले बाढ़ से प्रभावित हुई धान की फसल को बचाने की चुनौती थी और अब संभावित चक्रवाती तूफान ने चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में कम अवधि वाली धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है और किसान कटाई की तैयारी कर रहे हैं।
मौसम विभाग ने बस्तर संभाग के कई जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इससे खेतों में खड़ी धान की फसल गिरने और कटी हुई फसल की गुणवत्ता खराब होने की आशंका है।
बीते दिनों इंद्रावती नदी में आई बाढ़ के कारण नदी किनारे के कई गांवों के खेत लंबे समय तक पानी में डूबे रहे थे। इससे फसल की बढ़वार प्रभावित हुई और कुछ स्थानों पर धान सड़ने तथा दाने नहीं भरने की समस्या सामने आई।
संभावित खतरे को देखते हुए बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने प्रशासनिक अमले को सतर्क रहने और परिस्थितियों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं। किसान अब मौसम साफ रहने की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि समय पर कटाई पूरी की जा सके।
3. 75 दिवसीय बस्तर दशहरा का समापन 27 अक्टूबर को
बस्तर का ऐतिहासिक 75 दिवसीय दशहरा पर्व अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। 27 अक्टूबर को मावली माता की विदाई के साथ पर्व का समापन होगा।
इस वर्ष बस्तर दशहरा में संभाग के 81 परगनों के ग्रामीण देवी-देवताओं के साथ ओडिशा और धमतरी के नगरी-सिहावा क्षेत्र से भी देवी-देवता शामिल हुए। घंटियों वाले कोलादेव, आंगादेव, छत्र, डोली और लाट सहित एक हजार से अधिक देवी-देवताओं की उपस्थिति ने इस पर्व की विशेषता को दर्शाया।
परंपरा के अनुसार, माता को संस्कृत में लिखी विनय-पत्रिका भेजकर बस्तर दशहरा में शामिल होने का आमंत्रण दिया जाता है। आमंत्रण स्वीकार कर पहुंचीं मावली माता की दंतेश्वरी मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना की जा रही है।
27 अक्टूबर को राजपरिवार, मांझी-चालकी और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मावली माता को विदाई दी जाएगी। इस दौरान महाआरती, गुलाब के फूलों की वर्षा और सशस्त्र पुलिस बल की ओर से हर्ष फायर कर सलामी देने की परंपरा निभाई जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए 51 किलो लड्डू और बूंदी से पांच हजार से अधिक प्रसाद पैकेट तैयार किए जा रहे हैं।
4. रावघाट परियोजना के कर्मचारियों की हड़ताल तेज
कांकेर-नारायणपुर-रावघाट लौह अयस्क परियोजना में कर्मचारियों की 16 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। 23 अक्टूबर से शुरू हुए आंदोलन में 417 से अधिक कर्मचारी वेतन, भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा और अन्य भत्तों से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।
कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। केसीसीएल और बीएसपी के सक्षम अधिकारियों के आंदोलन स्थल पर नहीं पहुंचने से नाराजगी बढ़ने की बात कही जा रही है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि मांगों का समाधान नहीं होने पर 26 अक्टूबर से खनन और परिवहन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इससे परियोजना का कामकाज और लौह अयस्क की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।
5. मतदाता सूची पुनरीक्षण पर कांग्रेस का अभियान
नारायणपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान चलाने की तैयारी की है। पूर्व विधायक चंदन कश्यप ने राजीव भवन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए अभियान की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि मताधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटना गंभीर विषय है। कांग्रेस ने SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का दावा करते हुए प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।
पार्टी ने निर्वाचन आयोग से नाम हटाने के मामलों की जानकारी सार्वजनिक करने और प्रभावित मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की है। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। हालांकि, नाम हटाए जाने के आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इन बयानों से नहीं होती है।
प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक गांवों में जनसंपर्क, बूथ स्तर पर मतदाता सूची का सत्यापन और चौपाल आयोजित करने की योजना है। कांग्रेस ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन के सहयोगियों के साथ राष्ट्रीय रैली आयोजित करने की भी जानकारी दी है।
6. ओडिशा में बाढ़ का खतरा, भालूगुड़ा एनीकट के सभी 38 जलद्वार खोले गए
संभावित चक्रवाती तूफान और भारी बारिश के बीच बस्तर में अंतरराज्यीय जल प्रबंधन के तहत भालूगुड़ा एनीकट के सभी 38 जलद्वार खोल दिए गए हैं। यह निर्णय ओडिशा में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए छत्तीसगढ़ और ओडिशा के जल संसाधन विभागों के बीच समन्वय के बाद लिया गया।
ओडिशा की ओर से सहयोग का आग्रह मिलने पर छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग की विद्युत एवं यांत्रिकी शाखा, बस्तर ने कार्रवाई की। एनएमडीसी के समन्वय से पहले से चालू 28 जलद्वारों के अलावा शेष 10 जलद्वार भी खुलवा दिए गए।
हालांकि, एनीकट का पानी सिंचाई, निस्तारी और भूजल पुनर्भरण के लिए महत्वपूर्ण होने के कारण स्थानीय किसानों ने शुरुआत में अपनी जरूरतों को लेकर विरोध जताया। अधिकारियों ने उन्हें संभावित आपदा और ओडिशा में बाढ़ के खतरे की गंभीरता से अवगत कराया। इसके बाद सभी जलद्वार खोलने पर सहमति बनी।
अब संभावित बारिश के दौरान जलस्तर और आसपास के इलाकों की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। इस कार्रवाई से आपदा प्रबंधन में अंतरराज्यीय सहयोग सामने आया है, वहीं स्थानीय जल जरूरतों के प्रबंधन की चुनौती भी बनी हुई है।




