छत्तीसगढ़बकावंडबस्तर

बकावंड के जंगलों में वन्यजीव की आहट से दहशत, उलनार-पाईकपाल में मिले बड़े पदचिह्न!

 

खराहा डोंगरी के पास धान के खेत की मेड़ पर वन्यजीव दिखने की चर्चा, वन विभाग की टीम जांच में जुटी — नवरात्रि में भद्रकाली माता मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सतर्कता जरूरी

बकावंड 11 अक्टूबर 2026

डमरू कश्यप

बस्तर जिले के बकावंड ब्लॉक अंतर्गत वन विभाग की बकावंड रेंज के ग्राम पंचायत उलनार और पाईकपाल के जंगलों में इन दिनों वन्यजीव की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों के बीच चिंता का माहौल है। ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, बीते शनिवार सुबह कुछ ग्रामीणों और राहगीरों ने एक बड़े वन्यजीव को देखने की बात कही। वंही रविवार सुबह खराहा डोंगरी के समीप धान खेत मेड़ पर ग्रामीणों द्वारा आसपास बड़े आकार के पदचिह्न दिखाई देने की जानकारी भी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर इसे शेर बताए जाने की चर्चा है, हालांकि वन्यजीव की वास्तविक पहचान की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम

ग्रामीणों से वन्यजीव दिखाई देने की सूचना मिलने के बाद बकावंड वन विभाग रेंज की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। वन विभाग द्वारा पदचिह्नों तथा घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। फिलहाल संबंधित वन्यजीव की मौजूदगी और उसकी प्रजाति को लेकर कोई ठोस आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में जांच पूरी होने और विभागीय पुष्टि होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

घने जंगल और ग्रामीण इलाका होने से बढ़ी चिंता

उलनार, पाईकपाल, जूनावनी और टिवंसगुड़ा सहित आसपास का क्षेत्र घने जंगलों और वनक्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। जंगल से लगे खेतों और ग्रामीण रास्तों पर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में किसी बड़े वन्यजीव की मौजूदगी की सूचना से ग्रामीणों में स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग क्षेत्र में निगरानी बढ़ाए, पदचिह्नों की वैज्ञानिक तरीके से जांच करे और लोगों को वन्यजीवों से सुरक्षित रहने के संबंध में आवश्यक जानकारी दे।

नवरात्रि में भद्रकाली माता मंदिर पहुंचते हैं श्रद्धालु

उलनार स्थित प्रसिद्ध भद्रकाली माता मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर तक आने-जाने वाले मार्गों के आसपास जंगल होने के कारण मौजूदा सूचना ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता की आवश्यकता बढ़ा दी है।

ऐसे में वन विभाग को मंदिर तक आने-जाने वाले रास्तों और आसपास के वनक्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, जरूरत के अनुसार गश्त की व्यवस्था करने तथा ग्राम पंचायत और मंदिर समिति के साथ समन्वय बनाने की आवश्यकता है। यदि वन्यजीव की मौजूदगी की पुष्टि होती है, तो विभाग को परिस्थितियों के अनुरूप सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।

ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील जरूरी

वन्यजीव की पहचान स्पष्ट होने तक ग्रामीणों को अफवाहों से बचने और बिना पुष्टि के किसी संदेश या तस्वीर को साझा नहीं करने की जरूरत है। लोगों को अकेले जंगल की ओर जाने, वन्यजीव के करीब पहुंचने या पदचिह्नों का पीछा करने से बचना चाहिए। किसी वन्यजीव के दिखाई देने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए तत्काल वन विभाग को सूचना देना उचित होगा।

अब सबकी नजर वन विभाग की जांच पर है।

खराहा डोंगरी के पास मिले बताए जा रहे पदचिह्न और वन्यजीव देखे जाने की सूचना की पुष्टि होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि क्षेत्र में किस वन्यजीव की मौजूदगी है। फिलहाल ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग की सतर्क निगरानी और समय पर आधिकारिक जानकारी जारी करना महत्वपूर्ण है।

Related Articles

Back to top button
You Cannot able to copy the content! All Reserved Rights of Bastar Dagar