बकावंड की आंगनबाड़ियों में चावल-दाल का संकट: बच्चों के पोषण पर संकट, कार्यकर्ता अपनी जेब से कर रहे खर्च

बकावंड। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के करपावण्ड सेक्टर की ज्यादातर आंगनबाड़ियों में चावल-दाल खत्म होने से बच्चों के पोषण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खाद्यान्न की कमी से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि शासन की ओर से उपलब्ध कराया जाने वाला चावल-दाल बच्चों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त नहीं है, जिसके कारण महीनेभर का राशन भी पूरा नहीं पड़ता।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अनुसार, केंद्रों में दर्ज बच्चों की संख्या के हिसाब से चावल-दाल की आपूर्ति कम होने के कारण उन्हें कई बार अपने स्तर पर व्यवस्था करनी पड़ती है। कुछ कार्यकर्ताओं का दावा है कि वे अपनी जेब से पैसे खर्च कर बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रही हैं। खाद्यान्न की कमी के चलते बच्चों के नियमित पोषण को लेकर चिंता बढ़ गई है।
राशन की कमी पर कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल
कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि जब शासन की ओर से चावल-दाल उपलब्ध कराया जाता है, तो आखिर राशन की मात्रा बच्चों की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त क्यों नहीं हो पा रही है? उनका कहना है कि समय पर खाद्यान्न नहीं मिलने से आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन प्रभावित हो रहा है और उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सीडीपीओ ने एक सप्ताह में राशन वितरण का दिया आश्वासन
इस संबंध में करपावण्ड की बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) श्रीमती आशा दास से बात की गई। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के भीतर चावल का वितरण कर दिया जाएगा।
हालांकि, इस आश्वासन के बाद भी सवाल बना हुआ है कि जब तक आंगनबाड़ी केंद्रों तक चावल नहीं पहुंचता, तब तक बच्चों के भोजन और पोषण की व्यवस्था कैसे होगी? कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही इस समस्या का समाधान करेगा।
ग्रामीणों ने की जांच और पर्याप्त राशन की मांग
इस मामले को लेकर ग्रामीणों बुधराम नेताम, नीलम कश्यप, महेश नेताम, प्रकाश नेताम, सरपंच जोगेंद्र भारती, कमल कश्यप, लखमू कश्यप, लक्ष्मीनाथ नेताम और सुरेश नेताम ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को नियमित रूप से पोषण आहार उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने सभी प्रभावित आंगनबाड़ियों में पर्याप्त मात्रा में चावल-दाल की आपूर्ति सुनिश्चित करने और राशन की कमी के कारणों की जांच कराने की मांग की है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के पोषण के लिए नियमित खाद्यान्न आपूर्ति कब तक सुनिश्चित हो पाती है।




