छत्तीसगढ़दिल्लीबस्तर संभाग

बस्तर के विकास को नई रफ्तार देने अमित शाह से मिले सांसद महेश कश्यप: हर जिले में सहकारी बैंक, नए खरीद केंद्र और विशेष सहकारिता पैकेज की मांग

नई दिल्ली/बस्तर। बस्तर लोकसभा सांसद महेश कश्यप ने  सोमवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से नई दिल्ली स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात कर बस्तर लोकसभा क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास, वित्तीय समावेशन और सहकारिता व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़ा विस्तृत मांगपत्र सौंपा। सांसद ने कहा कि बस्तर में सुरक्षा और शांति का माहौल बनने के बाद अब सबसे बड़ी जरूरत आर्थिक सशक्तीकरण की है। इसके लिए सहकारिता आधारित विकास मॉडल को प्राथमिकता देना आवश्यक है, जिससे जनजातीय किसानों, युवाओं और ग्रामीण परिवारों को सीधे लाभ मिल सके।

महेश कश्यप ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि बस्तर देश का सबसे बड़ा जनजातीय और लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहा क्षेत्र है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार द्वारा चलाए गए सुरक्षा एवं विकास अभियानों के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। बस्तर तेजी से शांति, विश्वास और विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। ऐसे समय में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत कर इस बदलाव को स्थायी आर्थिक विकास में बदला जा सकता है।

सांसद ने बताया कि वर्तमान में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक का मुख्यालय केवल जगदलपुर में संचालित है, जबकि एकीकृत बस्तर के पुनर्गठन के बाद बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा छह अलग-अलग जिले बन चुके हैं। इसके बावजूद इन जिलों में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की अलग शाखा या क्षेत्रीय मुख्यालय स्थापित नहीं किए गए हैं। इसका सीधा असर किसानों और ग्रामीणों को मिलने वाली बैंकिंग एवं सहकारी सेवाओं पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि बस्तर के अधिकांश किसान लघु एवं सीमांत किसान हैं, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से धान, कोदो, कुटकी, रागी, मक्का और लघु वनोपज पर निर्भर है। वर्तमान में सहकारी समितियों के माध्यम से संचालित खरीद केंद्रों की संख्या क्षेत्र की आवश्यकता के मुकाबले काफी कम है। इसके कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते हैं तथा कई बार उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य भी समय पर नहीं मिल पाता।

इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सांसद महेश कश्यप ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा—सभी जिला मुख्यालयों में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा अथवा क्षेत्रीय मुख्यालय स्थापित करने का अनुरोध किया। साथ ही पूर्व नक्सल प्रभावित और जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष “सहकारिता विकास पैकेज” स्वीकृत करने की मांग की, ताकि सहकारी बैंकिंग, कृषि ऋण, भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन संबंधी आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा सके।

सांसद ने प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) को बहुउद्देशीय सहकारी संस्थाओं के रूप में विकसित करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इन समितियों को बैंकिंग सेवाएं, कृषि ऋण, उर्वरक एवं बीज वितरण, गोदाम, डिजिटल सेवाएं और जनसेवा केंद्र जैसी सुविधाओं से जोड़ा जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को एक ही स्थान पर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध हो सकें।

महेश कश्यप ने धान के अलावा कोदो, कुटकी, रागी और मक्का जैसी मोटे अनाज की फसलों तथा तेंदूपत्ता, महुआ, इमली, सालबीज सहित अन्य लघु वनोपज की खरीद के लिए सहकारी समितियों के माध्यम से नए खरीद केंद्र खोलने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान खरीद केंद्र किसानों की जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त नहीं हैं और उनकी संख्या बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

इसके अलावा महिला स्व-सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), वन धन विकास केंद्रों और जनजातीय सहकारी समितियों को विशेष वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया गया। सांसद का कहना है कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

मांगपत्र के साथ सांसद ने बस्तर लोकसभा क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण और जनजातीय इलाकों में नई सहकारी बैंक शाखाएं खोलने का प्रस्ताव भी सौंपा। इसमें बीजापुर, सांकरापल्ली, नेमेड़, बासागुड़ा, कुटरू, गंगालूर, पालनार, धुरली, कटेकल्याण, छिंदनार, एड़का, कुटुल, कस्तूरमेटा, बेनूर, सुकमा, तालनार, शबरी, परकण्डा, मराईगुड़ा और गादीरास जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है।

सांसद महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बाद अब वित्तीय समावेशन और आर्थिक विकास को गति देने की आवश्यकता है। यदि सहकारिता आंदोलन को मजबूत किया जाता है तो किसानों की आय में वृद्धि होगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जनजातीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और पूर्व नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की प्रक्रिया को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल “विकसित भारत @2047” के संकल्प को साकार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।

अंत में सांसद ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से इन सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया, ताकि बस्तर के लाखों किसानों, ग्रामीणों और जनजातीय परिवारों को सहकारिता आधारित विकास का प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

Related Articles

Back to top button
You Cannot able to copy the content! All Reserved Rights of Bastar Dagar