आदिवासी सम्मान पर सियासत: दीपक बैज के बयान पर केदार कश्यप का तीखा पलटवार

रायपुर,1 अगस्त 2026
वन मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के बस्तर पंडुम और राष्ट्रपति भवन में बस्तर के आदिवासी प्रतिनिधियों की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से हुई मुलाकात पर दिए गए बयान का कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि बस्तर के जनजातीय समाज, उसकी संस्कृति, परंपराओं और अस्मिता का खुला अपमान है।
उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और आदिवासी गौरव का महापर्व है। इस आयोजन ने लोक कलाकारों, मांझी-चालकी व्यवस्था और जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान दिलाया है। ऐसे आयोजन पर सवाल उठाना कांग्रेस की आदिवासी समाज के प्रति सोच को दर्शाता है।
केदार कश्यप ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में बस्तर के आदिवासी प्रतिनिधियों की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई मुलाकात एक ऐतिहासिक अवसर था। उन्होंने कहा कि पहली बार बस्तर के पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतिनिधियों को राष्ट्रपति भवन में सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया गया, उनसे आत्मीय संवाद हुआ और उनकी संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान मिली। इस गौरवपूर्ण अवसर का उपहास करना आदिवासी अस्मिता का अपमान है।
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस आदिवासी समाज को कांग्रेस ने वर्षों तक केवल वोट बैंक के रूप में देखा, आज जब उसी समाज को सम्मान और राष्ट्रीय पहचान मिल रही है तो कांग्रेस को इससे परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि देशभर में बस्तर की संस्कृति की सराहना हो रही है, लेकिन कांग्रेस इसमें भी राजनीति कर रही है।
मंत्री ने कांग्रेस से सवाल किया कि अपने लंबे शासनकाल में उसने बस्तर की संस्कृति, लोक कलाकारों और पारंपरिक व्यवस्थाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए कौन-सा ऐतिहासिक कार्य किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान बस्तर की पहचान नक्सली हिंसा, भय और पिछड़ेपन से जुड़ी रही, जबकि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर शांति, विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक गौरव की नई पहचान बना रहा है।
उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम और राष्ट्रपति भवन में आदिवासी प्रतिनिधियों के सम्मान का उपहास कर कांग्रेस ने केवल सरकार का नहीं, बल्कि हजारों आदिवासी कलाकारों, मांझी-चालकी व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों और पूरे बस्तर के स्वाभिमान का भी अपमान किया है।
अंत में केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस को बस्तर की सकारात्मक छवि और बदलते स्वरूप से असहजता है, लेकिन आज का बस्तर अपनी संस्कृति पर गर्व करते हुए विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है और देशभर में अपनी नई पहचान स्थापित कर रहा है।




