छत्तीसगढ़

महादेव घाट ओवरब्रिज परियोजना 9 माह पीछे खिसकी, ठेका एजेंसी ने नहीं किया अनुबंध, अब होगा री-टेंडर

रायपुर, 10 जून 2026

रायपुर और अमलेश्वर के बीच बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए प्रस्तावित महादेव घाट ओवरब्रिज परियोजना ठेका एजेंसी द्वारा अनुबंध नहीं किए जाने के कारण करीब 9 माह पीछे खिसक गई है। वर्ष 2024 में मंजूरी मिलने के बाद नवंबर 2025 में लोक निर्माण विभाग (PWD) ने 18.66 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया था, लेकिन चयनित एजेंसी के पीछे हटने से अब परियोजना के लिए दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी है।

तकनीकी और वित्तीय परीक्षण के बाद दिसंबर 2025 में विश्रामपुर की एग्रो स्टील वर्क कंपनी को कार्य आवंटित करते हुए वर्क ऑर्डर जारी किया गया था। हालांकि, वर्क ऑर्डर मिलने के बावजूद कंपनी ने विभाग के साथ अनुबंध नहीं किया। लगभग चार महीने तक इंतजार करने के बाद विभाग ने एजेंसी की सुरक्षा जमा राशि जब्त कर अप्रैल 2026 में री-टेंडर जारी कर दिया।

10 दिनों में नई एजेंसी का चयन संभव

PWD अधिकारियों के अनुसार, नए टेंडर में चार कंपनियों ने भाग लिया है। तकनीकी मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और फिलहाल वित्तीय प्रस्तावों की जांच जारी है। अगले 10 दिनों में नई एजेंसी का चयन कर कार्य आवंटन और अनुबंध प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

मानसून बना नई चुनौती

विभाग की योजना गर्मी के दौरान खारुन नदी का जलस्तर कम होने पर नींव और संरचनात्मक कार्य शुरू करने की थी। लेकिन परियोजना में हुई देरी के कारण अब मानसून निर्माण कार्य की गति को प्रभावित कर सकता है। इससे परियोजना के शुरुआती चरण में अतिरिक्त चुनौतियां आने की आशंका है।

180 मीटर लंबा होगा फोरलेन ओवरब्रिज

प्रस्तावित ओवरब्रिज 180 मीटर लंबा और 17 मीटर चौड़ा होगा। यह स्टील संरचना महादेव घाट के पुराने पुल के समीप खारुन नदी पर बनाई जाएगी। परियोजना शुरू होने के बाद निर्माण एजेंसी को कार्य पूरा करने के लिए 18 माह का समय दिया जाएगा।

PWD के ट्रैफिक सर्वे के मुताबिक शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक इस मार्ग पर सबसे अधिक दबाव रहता है। रायपुर, अमलेश्वर, पाटन, दुर्ग-भिलाई और नवा रायपुर के बीच आने-जाने वाले हजारों वाहन प्रतिदिन जाम की समस्या से जूझते हैं।

30 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन

अधिकारियों का कहना है कि अमलेश्वर, पाटन रोड और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से आबादी बढ़ रही है। इसी को देखते हुए ओवरब्रिज की डिजाइन अगले 30 वर्षों की यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

इन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

परियोजना पूरी होने के बाद महादेव घाट, चंगोराभाठा, डीडी नगर, संतोषी नगर, प्रोफेसर कॉलोनी, अमलेश्वर, अंजोरा, पाटन रोड, दुर्ग-भिलाई और नवा रायपुर से जुड़े हजारों लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी।

डिजाइन को लेकर अलग-अलग दावे

ठेका एजेंसी के प्रतिनिधि अजय अग्रवाल का दावा है कि ड्राइंग और डिजाइन में तकनीकी विसंगतियां थीं, जिसके चलते कंपनी ने अनुबंध नहीं किया। वहीं PWD रायपुर के मुख्य अभियंता एसके कोरी ने कहा कि डिजाइन में कोई तकनीकी खामी नहीं थी, बल्कि उसे और अधिक व्यावहारिक एवं सरल बनाने के लिए कुछ संशोधन किए गए हैं।

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