छत्तीसगढ़

जामड़ी पाटेश्वर धाम के खिलाफ हजारों आदिवासियों का प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट घेरकर सौंपा ज्ञापन

दल्ली राजहरा, 02 जून 2026

बालोद जिले की डौंडीलोहारा तहसील स्थित जामड़ी पाटेश्वर धाम और उसके संस्थापक बाल योगेश्वर श्रीराम बालक दास महात्यागी के खिलाफ सर्व आदिवासी समाज ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग बालोद कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

आदिवासी समाज ने आरोप लगाया कि संरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जा और निर्माण किया गया है। साथ ही आदिवासियों की आस्था के प्रमुख केंद्र “जल कैना” को भी क्षतिग्रस्त और तहस-नहस किए जाने का आरोप लगाया गया है। इन मुद्दों को लेकर समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर कार्रवाई की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया है कि ग्राम तुएगोंदी में वर्षों से संचालित जामड़ी पाटेश्वर धाम के संचालन के दौरान संविधान, वन कानून और आदिवासी अधिकारों की अनदेखी करते हुए संरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण किया गया। समाज का आरोप है कि विभिन्न विभागों द्वारा समय-समय पर अवैध कब्जे और निर्माण की पुष्टि किए जाने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

आदिवासी समाज ने दावा किया कि 24 नवंबर 2020 को वन मंडलाधिकारी बालोद ने पत्र जारी कर संरक्षित वन कक्ष क्रमांक 304 में अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण की जानकारी जिला प्रशासन को दी थी। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने से समाज में रोष व्याप्त है।

समाज का यह भी कहना है कि 11 अक्टूबर 2021 को ग्राम तुएगोंदी की वन अधिकार समिति ने सामुदायिक वन अधिकार पट्टे के लिए दावा प्रस्तुत किया था, लेकिन आज तक ग्रामीणों को अधिकार नहीं मिले। वहीं, उसी क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से निर्माण कार्य किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी का आरोप

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि 3 जून 2019 को प्रशासन ने संरक्षित वन क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों की सामग्री जब्त कर आगे निर्माण नहीं करने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहे। समाज ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम अवहेलना की गई और जिम्मेदार अधिकारियों ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

‘जल कैना’ को नुकसान पहुंचाने का आरोप

आदिवासी समाज का आरोप है कि तुएगोंदी स्थित “जल कैना”, जो आदिवासी समुदाय की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है, उसे क्षतिग्रस्त किया गया है। समाज ने इसे आदिवासी आस्था और संस्कृति पर सीधा हमला बताया है।

ये हैं प्रमुख मांगें

सर्व आदिवासी समाज ने प्रशासन से:

  • संरक्षित वन भूमि पर हुए कथित अतिक्रमण और निर्माण की उच्च स्तरीय जांच।
  • बाल योगेश्वर श्रीराम बालक दास महात्यागी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई।
  • सामुदायिक वन अधिकार पट्टों का शीघ्र वितरण।
  • जल कैना स्थल का संरक्षण और पुनर्स्थापना।
  • संरक्षित वन क्षेत्र में भविष्य के अतिक्रमण पर रोक।
  • पूरे मामले की स्वतंत्र या न्यायिक जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

समाज ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

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