
जगदलपुर, 31 मई 2026
बस्तर के घने जंगलों में दुर्लभ प्रजाति के स्फिरोथिका मस्की फ्रॉग (मस्की बरोइंग फ्रॉग) की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह विशेष मेंढक आमतौर पर रेतीली और नम मिट्टी के भीतर छिपकर रहता है तथा बारिश शुरू होते ही बाहर निकलकर सक्रिय हो जाता है।
जानकारी के अनुसार, माचकोट फॉरेस्ट रेंज में बाघ के पंजों के निशानों का अध्ययन करने पहुंचे जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रत्यूष महापात्र को रात करीब 8 बजे यह दुर्लभ मेंढक सड़क पार करते हुए दिखाई दिया। वैज्ञानिकों के अनुसार यह निशाचर (रात में सक्रिय रहने वाला) जीव है, जो वर्षा ऋतु में अधिक दिखाई देता है।
प्रत्यूष महापात्र ने बताया कि यह मेंढक मध्यम आकार का होता है। इसका सिर शरीर की तुलना में अधिक चौड़ा होता है और पिछली टांगों में मौजूद फावड़े जैसी विशेष संरचना इसे गीली मिट्टी को आसानी से खोदने में मदद करती है। इसकी पीठ पर अंग्रेजी के उल्टे ‘V’ आकार का निशान तथा शरीर पर पीले-कत्थई रंग के धब्बे इसकी पहचान हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रजाति अस्थायी जलभराव वाले गड्ढों में प्रजनन करती है। भारत के अलावा यह मेंढक पाकिस्तान और नेपाल में भी पाया जाता है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि बारिश के मौसम में जंगलों में रात्रिकालीन सर्वेक्षण के दौरान कई दुर्लभ और कम ज्ञात प्रजातियां देखने को मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि कई बार एक जैसे दिखने वाले मेंढकों की वास्तविक पहचान डीएनए बारकोडिंग के माध्यम से ही संभव हो पाती है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ में पाई जाने वाली मेंढकों की विभिन्न प्रजातियों पर आधारित एक विस्तृत पुस्तक जल्द प्रकाशित होने वाली है, जिससे प्रदेश की जैव विविधता को समझने में मदद मिलेगी।




