NEET-UG पेपरलीक मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, NTA को हटाने की मांग तेज

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के कथित पेपरलीक मामले ने अब बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है। मामला सीधे Supreme Court of India पहुंच गया है, जहां परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी National Testing Agency (NTA) को हटाने और नई स्वतंत्र संस्था बनाने की मांग की गई है।
यह याचिका Federation of All India Medical Association (FAIMA) की ओर से दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि NEET-UG 2026 परीक्षा को न्यायिक निगरानी में दोबारा आयोजित कराया जाए और पूरे मामले की जांच कर रही Central Bureau of Investigation (CBI) से चार सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट मांगी जाए।
हाई लेवल कमेटी बनाने की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी बनाने की मांग की गई है। इस समिति में साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और फॉरेंसिक साइंटिस्ट को शामिल करने का भी सुझाव दिया गया है।
FAIMA ने कहा है कि मौजूदा परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की जरूरत है। याचिका में “नेशनल एग्जाम इंटीग्रिटी कमीशन (NEIC)” नाम की नई संस्था बनाने का सुझाव दिया गया है, जो भविष्य की परीक्षाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करे।
ऑफलाइन नहीं, CBT मोड में परीक्षा कराने की मांग
याचिका में कहा गया है कि पेपर लीक रोकने के लिए परीक्षाएं ऑफलाइन की बजाय पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में कराई जाएं। साथ ही प्रश्नपत्रों को डिजिटल लॉक सिस्टम के जरिए सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
राजस्थान में परीक्षा रद्द, CBI कर रही जांच
पेपरलीक विवाद के बाद राजस्थान में NEET-UG परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी। जांच में सामने आया कि परीक्षा का पेपर प्रिंटिंग से पहले ही लीक हो गया था।
3 मई 2026 को आयोजित इस परीक्षा में देशभर से करीब 22 लाख छात्र शामिल हुए थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवाल हूबहू लीक पेपर से मेल खाते पाए गए।
मुख्य आरोपी शुभम खैरनार गिरफ्तार
CBI ने इस मामले के मुख्य आरोपी शुभम खैरनार को नासिक से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने करीब 10 लाख रुपये में पेपर खरीदा और बाद में अलग-अलग राज्यों के लोगों को 15 लाख रुपये प्रति सेट के हिसाब से बेचा।
पुलिस के मुताबिक शुभम आयुर्वेद चिकित्सा एवं सर्जरी में स्नातक है और अपने साथियों के साथ मेडिकल एडमिशन काउंसलिंग सेंटर चलाता था।
पांच राज्यों तक फैला नेटवर्क
जांच में इस पेपरलीक रैकेट के तार राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा समेत पांच राज्यों से जुड़े मिले हैं। नासिक, पुणे, लातूर, गुरुग्राम और सीकर जैसे शहर जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ आरोपियों ने छात्रों तक पेपर पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये का नेटवर्क तैयार किया था। देहरादून से गिरफ्तार एक आरोपी पर करीब 700 छात्रों तक पेपर पहुंचाने का आरोप है।
छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी
पेपरलीक मामले के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है। कई छात्र संगठनों और मेडिकल एसोसिएशनों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और CBI जांच पर टिकी है।




