छत्तीसगढ़

चौपाल में गूंजी तालियां और खुशियां: लखपति दीदियों के हौसले से गदगद हुए मुख्यमंत्री

रायपुर, 05 मई 2026।
सुशासन तिहार के तहत छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के पंडरिया स्थित लोखान पंचायत के आश्रित ग्राम कमराखोल में आयोजित चौपाल कार्यक्रम एक अलग ही मिसाल बनकर सामने आया। आम के पेड़ के नीचे लगी इस चौपाल में खुशियों, तालियों और आत्मविश्वास की गूंज सुनाई दी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दूरस्थ बैगा बाहुल्य क्षेत्र में पहुंचकर पीएम जनमन योजना के तहत किए गए कार्यों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों के बीच बैठकर सीधे संवाद किया। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला।

चौपाल में जब मुख्यमंत्री ने पूछा कि कितनी महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, तो कई महिलाओं ने हाथ उठाकर अपनी सफलता की कहानी बयां की। इससे उत्साहित मुख्यमंत्री ने सभी को और मेहनत कर “करोड़पति” बनने की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

लखपति दीदी कचरा तेलगाम ने महुआ और चार भेंट कर अपनी आत्मीयता दिखाई और बताया कि वे सेंट्रिंग प्लेट का काम कर सालाना करीब 80 हजार रुपये कमा रही हैं। वहीं रजमत बाई धुर्वे मटेरियल सप्लाई से 2.5 से 3 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। पशु सखी शिवरानी पटेल ने भी समूह से जुड़कर सब्जी उत्पादन से सालाना डेढ़ लाख रुपये की आमदनी का अनुभव साझा किया।

चौपाल में हुआ नामकरण
इस कार्यक्रम का एक भावुक पल तब आया जब एक महिला ने अपने नवजात बच्चे का नामकरण मुख्यमंत्री से करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने बच्चे को गोद में लेकर उसका नाम “रविशंकर बघेल” रखा और आशीर्वाद स्वरूप राशि भी प्रदान की। इस दौरान पूरा चौपाल तालियों से गूंज उठा।

मेधावी छात्रों को मिला प्रोत्साहन
चौपाल में पहुंचे मेधावी विद्यार्थियों को भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। 94.5% अंक लाने वाले छात्र राजेंद्र मसराम को पेन देकर उनके आईएएस बनने के सपने के लिए शुभकामनाएं दीं। वहीं 75% अंक प्राप्त करने वाली छात्रा हेम कुमारी को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।

ग्रामीणों को मिली सौगातें
मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की मांग पर कमराखोल में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिनमें सामुदायिक भवन, 6 किलोमीटर सड़क निर्माण, मुक्तिधाम शेड, महतारी सदन और तालाब गहरीकरण शामिल हैं।

यह चौपाल न केवल सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत दिखाने का मंच बना, बल्कि ग्रामीणों के आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सपनों को नई उड़ान देने का भी सशक्त माध्यम साबित हुआ।

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