छत्तीसगढ़

जल बंटवारे पर सख्ती: महानदी विवाद में दोनों राज्यों को 10 दिन का अल्टीमेटम

रायपुर, 23 अप्रैल 2026। महानदी जल बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच चल रहे लंबे विवाद में अब ट्रिब्यूनल ने सख्त रुख अपना लिया है। सुनवाई के दौरान दोनों राज्यों को 10 दिनों के भीतर महानदी बेसिन में जल उपलब्धता से जुड़े ताज़ा और अपडेटेड आंकड़े पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 2 मई को होगी।

सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश बेला त्रिवेदी की अध्यक्षता में गठित ट्रिब्यूनल ने 20 अप्रैल को हुई सुनवाई में दोनों पक्षों के तर्क सुने। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि पहले दिए गए आंकड़े पर्याप्त नहीं हैं, वर्तमान हालात के अनुसार नए डेटा की आवश्यकता है, ताकि वास्तविक जल उपलब्धता का सही आकलन हो सके।

महानदी बेसिन पर टिकी नजर

अधिकारियों के अनुसार महानदी बेसिन में कुल 14 प्रमुख नदियाँ शामिल हैं। इनमें से 9 नदियाँ छत्तीसगढ़ में बहती हैं—महानदी, शिवनाथ, हसदेव, अरपा, खारुन, पैरी, सोंदूर, मंड और जोंक (ऊपरी हिस्सा)। वहीं ओडिशा में महानदी, इब, तेल, ओंग और जॉक (निचला हिस्सा) प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कम संख्या के बावजूद ओडिशा की नदियाँ जल प्रवाह और डेल्टा निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं।

निरीक्षण के बाद बढ़ी सख्ती

हाल ही में ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों के महानदी बेसिन क्षेत्र का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया था। निरीक्षण और अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद ही अद्यतन आंकड़े फिर से मांगे गए हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

गर्मी में बढ़ी पानी की मांग

सूत्रों के मुताबिक, ओडिशा ने गर्मी के मौसम में अतिरिक्त पानी की मांग रखी है। वहीं छत्तीसगढ़ ने जलस्तर कम होने का हवाला देते हुए अतिरिक्त पानी छोड़ने में असमर्थता जताई है। अधिकारियों का कहना है कि गर्मियों में जल स्तर काफी नीचे चला जाता है, जिससे अतिरिक्त पानी देना संभव नहीं है।

समाधान के लिए जरूरी बड़े प्रोजेक्ट

दोनों राज्यों के बीच यह सहमति बनी है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट जरूरी हैं। टेक्निकल एक्सपर्ट कमेटी ने नए प्रोजेक्ट्स के प्रस्ताव तैयार किए हैं और अधूरे निर्माण कार्यों को फिर से शुरू करने पर भी सहमति बनी है।

करीब 900 किलोमीटर लंबी महानदी में से लगभग 357 किमी हिस्सा छत्तीसगढ़ और 494 किमी ओडिशा में बहता है। औद्योगिक गतिविधियों और सिंचाई क्षेत्र के विस्तार के चलते पानी की मांग बढ़ने से विवाद और गहराता जा रहा है।

राजनीतिक स्तर पर भी हल की कोशिश

इस मुद्दे को लेकर पहले भी कई बार उच्च स्तर पर बातचीत हो चुकी है। हाल ही में विष्णु देव साय और मोहन चरण मांझी के बीच बैठक में भी समाधान के प्रयासों पर चर्चा हुई थी।

अब सभी की नजर 2 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां इस लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद के समाधान की दिशा में ठोस प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है।

Related Articles

Back to top button
You Cannot able to copy the content! All Reserved Rights of Bastar Dagar