विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार रस्म में शामिल होंगे देश के गृहमंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय



राजधानी में बस्तर दशहरा समिति ने दिया आमंत्रण, सांसद महेश कश्यप ने की घोषणा
रायपुर/जगदलपुर। छह सौ वर्षों से भी अधिक समय से परंपरागत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाने वाला विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा इस वर्ष और अधिक भव्यता के साथ आयोजित होगा। राजधानी रायपुर में बस्तर दशहरा समिति ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, कैबिनेट मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद कमलेश जांगड़े, विधायक अमर अग्रवाल सहित भाजपा संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारियों को औपचारिक आमंत्रण प्रदान किया।
इस अवसर पर आमंत्रित गणमान्य अतिथियों ने बस्तर दशहरा समिति का आभार व्यक्त करते हुए इस ऐतिहासिक पर्व की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं। निमंत्रण कार्यक्रम के पश्चात उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, बस्तर सांसद महेश कश्यप, पश्चिम बंगाल के विधायक सुशांत घोष तथा सर्व बंगाली समाज के 250 से अधिक सदस्यों ने सामूहिक रूप से बंगाल फाइल फिल्म का आनंद भी लिया।
स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट रायपुर पर मीडिया से बातचीत करते हुए बस्तर सांसद महेश कश्यप ने सभी पत्रकारों को इस ऐतिहासिक और अद्वितीय आयोजन में आमंत्रित करते हुए कहा—
“बस्तर दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यह भारत का सबसे अनूठा और लंबा चलने वाला पर्व है, जो 75 दिनों तक विविध रस्मों और लोक सहभागिता के साथ संपन्न होता है। यह रावण वध पर आधारित न होकर माँ दंतेश्वरी की भक्ति और जनजातीय परंपराओं को समर्पित है।”
सांसद कश्यप ने बताया कि इस वर्ष मुरिया दरबार रस्म में देश के गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, कैबिनेट मंत्री, सांसद एवं विधायकगण विशेष रूप से शामिल होंगे। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बस्तर दशहरा समिति ने आमंत्रण भेजा है।
निमंत्रण कार्यक्रम में बस्तर दशहरा समिति अध्यक्ष एवं सांसद महेश कश्यप, उपाध्यक्ष बलराम मांझी, चालकी एवं अन्य पदाधिकारी, भाजयुमो कार्यसमिति सदस्य रमन चौहान, देवेंद्र कश्यप एवं शशांक श्रीवास्तव मौजूद रहे।
भक्ति, परंपरा और जनभागीदारी से जुड़ा यह पर्व बस्तर की पहचान है, जो न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश को जोड़ता है।




