
बारिश और हवा आते ही ठप हो जाती है बिजली आपूर्ति, घंटों अंधेरे में रहने को मजबूर ग्रामीण; स्थायी समाधान के बजाय हर बार फाल्ट सुधारने तक सीमित रहती है विभाग की कवायद
मनोज सिंह ठाकुर
बस्तर 23 अगस्त 2026
मधोता, खैरगुड़ा एवं कुंडगुड़ा क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की समस्या अब ग्रामीणों के लिए नई नहीं, बल्कि रोजमर्रा की परेशानी बनती जा रही है। बारिश हो या तेज हवा, मौसम बदलते ही क्षेत्र की बिजली व्यवस्था लड़खड़ा जाती है। रात से बिजली गुल होने के बाद ग्रामीणों को घंटों अंधेरे में रहने की मजबूरी बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली बंद होने पर विद्युत विभाग की ओर से हर बार एक ही जवाब सुनने को मिलता है—“फाल्ट है, सुधारने का काम चल रहा है।” सवाल यह है कि यदि बार-बार एक ही क्षेत्र में फाल्ट हो रहा है, तो आखिर इसकी स्थायी वजह तलाशने की जिम्मेदारी किसकी है?
बिजली गुल होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। मोबाइल चार्जिंग, पेयजल व्यवस्था, घरेलू कामकाज और अन्य जरूरी कार्य भी प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय बिजली बंद होने से परेशानी और बढ़ जाती है।
‘बार-बार फाल्ट, फिर भी स्थायी समाधान क्यों नहीं?
ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा हर बार फाल्ट सुधारकर बिजली बहाल कर दी जाती है, लेकिन समस्या दोबारा सामने न आए, इसके लिए विद्युत लाइन, पोल, ट्रांसफार्मर और अन्य उपकरणों की समुचित जांच एवं रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि जब विभाग को मालूम है कि बारिश और तेज हवा के दौरान इस क्षेत्र में बार-बार बिजली गुल होती है, तो मानसून से पहले विद्युत व्यवस्था की पूरी तकनीकी जांच क्यों नहीं की गई? आखिर हर बार ग्रामीणों को अंधेरे में रखने के बाद ही विभाग को फाल्ट नजर क्यों आता है?
‘ग्रामीणों ने मांगा स्थायी समाधान’
ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के अधिकारियों से तत्काल बिजली आपूर्ति बहाल करने के साथ मधोता, खैरगुड़ा एवं कुंडगुड़ा क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था का तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल खराबी आने के बाद उसे ठीक करना ही पर्याप्त नहीं है। विभाग को यह भी देखना होगा कि खराबी बार-बार क्यों हो रही है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि विद्युत लाइन, पोल, ट्रांसफार्मर और संबंधित उपकरणों की जांच कर जहां आवश्यक हो, वहां मरम्मत एवं सुधार कार्य कराया जाए, ताकि बारिश और तेज हवा के दौरान बार-बार बिजली गुल होने की समस्या से निजात मिल सके।
मधोता, खैरगुड़ा और कुंडगुड़ा के ग्रामीणों की परेशानी सिर्फ कुछ घंटों की बिजली कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि सवाल विभाग की तैयारी और स्थायी समाधान की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहा है। हर बार फाल्ट बताकर बिजली बहाल कर देना आसान रास्ता हो सकता है, लेकिन यदि वही फाल्ट बार-बार लौटकर आ रहा है तो उसकी जड़ तक पहुंचना भी विभाग की जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि विद्युत विभाग ग्रामीणों की इस लगातार बनी समस्या को “एक और फाल्ट” मानकर टालता है या फिर स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाता है।




