अबुझमाड़ की नई सुबह: आत्मनिर्भर बन रहीं ग्रामीण महिलाएं

बस्तर, 3 सितंबर 2026
बस्तर के सुदूर और दुर्गम अबुझमाड़ क्षेत्र में महिलाओं के जीवन में बदलाव की नई तस्वीर उभर रही है। नारायणपुर और ओरछा विकासखंड की ग्रामीण महिलाएं अब घरेलू सीमाओं से आगे बढ़कर स्वरोजगार और आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं। वन विभाग की पहल और चक्रिय निधि से मिली आर्थिक मदद ने इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।
वर्ष 2026-27 में 10 महिला स्व-सहायता समूहों को 37 लाख रुपये की चक्रिय निधि से ऋण उपलब्ध कराया गया। इसके बाद महिलाएं अलग-अलग रोजगार गतिविधियों से जुड़कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं। कुछ महिलाएं जंगलों से इमली और माहुल पत्ते एकत्र कर दोना-पत्तल निर्माण कर रही हैं, जबकि कुछ कच्चे फूलझाड़ू का प्रसंस्करण कर उसे बाजार तक पहुंचा रही हैं।
महिलाएं मसाला निर्माण, बेकरी, कैंटीन और किराना स्टोर जैसे गृह उद्योग और व्यवसाय भी संचालित कर रही हैं। इन गतिविधियों से उन्हें आर्थिक मजबूती के साथ आत्मविश्वास भी मिला है।
स्वरोजगार से होने वाली नियमित आय का असर अब परिवारों के जीवन पर भी दिखाई दे रहा है। महिलाएं अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का खर्च उठाने में सक्षम हो रही हैं। आर्थिक रूप से मजबूत होती अबुझमाड़ की महिलाएं महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की प्रेरणादायक मिसाल बन रही हैं।




