विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा में जोगी बिठाई की महत्वपूर्ण रस्म संपन्न, नौ दिनों तक निर्जला उपवास कर जोगी करेंगे आराधना

75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरा की अनूठी परंपरा; जोगी बिठाई की रस्म में आस्था, तपस्या और सदियों पुरानी जनजातीय संस्कृति का अद्भुत संगम
जगदलपुर 13 अक्टूबर 2026
विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा की पारंपरिक धार्मिक रस्मों के क्रम में सिरहासार भवन में महत्वपूर्ण रस्म जोगी बिठाई विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। लगभग 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरा पर्व में जोगी बिठाई का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।
इस परंपरा की सबसे खास बात है जोगी की कठिन तपस्या। जोगी नौ दिनों तक निर्जला उपवास रखकर एक ही स्थान पर बैठकर आराधना करते हैं। मान्यता है कि उनकी यह साधना बस्तर दशहरा और नवरात्र पर्व के निर्विघ्न एवं सफलतापूर्वक संपन्न होने की कामना से जुड़ी हुई है। नौ दिनों तक कठिन व्रत और पूजा-अर्चना के बाद ही जोगी अपनी साधना पूर्ण करते हैं।
बस्तर की इस अनूठी परंपरा को जोगी समाज के लोग पीढ़ियों से निभाते आ रहे हैं। इस धार्मिक रस्म में समाज के लोगों की विशेष भागीदारी रहती है। जोगी बिठाई केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, अटूट आस्था और परंपरागत विरासत का प्रतीक भी है।
जहां देशभर में दशहरा पर्व विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है, वहीं बस्तर में दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं और अनूठे अनुष्ठानों के कारण अलग पहचान रखता है। यहां पर्व की प्रत्येक रस्म के पीछे वर्षों पुरानी मान्यताएं और लोक आस्था जुड़ी हुई हैं।
नौ दिनों की कठिन तपस्या, अटूट श्रद्धा और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा—जोगी बिठाई बस्तर दशहरा की इसी विशिष्ट पहचान को जीवंत करती है। यही वजह है कि विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बस्तर की आस्था, संस्कृति और गौरवशाली विरासत का जीवंत प्रतीक है।
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