बकावंड जनपद में विकास कार्यों पर लगा ब्रेक? 93 पंचायतों की समस्याओं पर उठे सवाल

सामान्य सभा और समीक्षा बैठकें नियमित नहीं होने का आरोप, जनपद सदस्य लालेदं बाकडे ने अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर साधा निशाना
25 जनपद सदस्यों की भागीदारी पर सवाल, सीईओ से प्रत्येक दो माह में बैठक आयोजित कराने की मांग; बोले– विकास के नाम पर कहीं सिर्फ दो समोसा और एक कप चाय ही न रह जाए!
बकावंड 1 नवम्बर 2026
जनपद पंचायत बकावंड की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। विकासखंड की 93 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की समीक्षा और ग्रामीणों की मूलभूत समस्याओं के निराकरण को लेकर कांग्रेस समर्थित जनपद सदस्य लालेदं बाकडे ने जनपद पंचायत के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासनकाल में जनपद पंचायत की सामान्य सभा एवं समीक्षा बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं हो रही हैं, जिसका असर क्षेत्र के विकास कार्यों पर पड़ रहा है।
जनपद सदस्य लालेदं बाकडे ने जनपद पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब जनपद के निर्वाचित सदस्य ही बैठकों में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, तो इसके पीछे आखिर नाराजगी की वजह क्या है? उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी नेतृत्व की होती है। जब अपने ही सदस्यों के बीच तालमेल और संवाद की कमी होगी, तो क्षेत्र के विकास कार्यों को गति कैसे मिलेगी?
उन्होंने बताया कि बकावंड जनपद पंचायत में कुल 25 जनपद सदस्य हैं। प्रत्येक सदस्य अपने-अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं का प्रतिनिधित्व करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, आवास सहित अनेक मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं हैं। ऐसी स्थिति में सामान्य सभा और समीक्षा बैठकों का नियमित आयोजन बेहद जरूरी है, ताकि जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रख सकें और उनके निराकरण के लिए ठोस पहल हो सके।
हर दो माह में बैठक कराने की मांग
जनपद सदस्य बाकडे ने जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) से मांग की है कि नियमानुसार प्रत्येक दो माह में सामान्य सभा की बैठक आयोजित की जाए। बैठकों में शासन की विभिन्न योजनाओं, विकास कार्यों की प्रगति और लंबित जनसमस्याओं की समीक्षा होनी चाहिए। इससे सभी जनपद सदस्यों को योजनाओं की जानकारी मिलेगी और ग्रामीणों की समस्याओं को उचित मंच पर उठाकर उनके समाधान की दिशा में पहल की जा सकेगी।
‘दो समोसा और एक कप चाय’ तक सिमट जाएगा विकास!
जनपद सदस्य लालेदं बाकडे ने तंज कसते हुए कहा कि यदि जनपद पंचायत में इसी तरह बैठकें और विकास कार्य प्रभावित होते रहे, तो आने वाले समय में विकास के नाम पर केवल दो समोसा और एक कप चाय ही रह जाएगा। उन्होंने कहा कि जनपद पंचायत महज औपचारिकता निभाने का मंच नहीं, बल्कि 93 ग्राम पंचायतों के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी है। यहां नियमित बैठकें, जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है।
अब जवाबदेही तय करने की बारी
बकावंड जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर उठे इन सवालों ने क्षेत्र में विकास कार्यों की समीक्षा और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर नई चर्चा छेड़ दी है। अब देखना होगा कि सामान्य सभा एवं समीक्षा बैठकों को नियमित करने की दिशा में क्या पहल होती है और 93 ग्राम पंचायतों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदार जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी क्या कदम उठाते हैं। क्योंकि विकास की वास्तविक तस्वीर बैठकों और दावों से नहीं, बल्कि गांवों में धरातल पर दिखाई देने वाले कार्यों से सामने आती है।
महत्वपूर्ण सूचना / पक्ष संबंधी स्पष्टीकरण: यह समाचार जनपद सदस्य लालेदं बाकडे द्वारा उपलब्ध कराए गए बयान एवं उनके द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। समाचार में व्यक्त आरोपों एवं विचारों का श्रेय संबंधित जनप्रतिनिधि को है। समाचार प्रकाशन के समय जनपद पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। संबंधित पक्षों का जवाब या स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी निष्पक्षता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।
— बस्तर डगर | खबर आप तक




