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अधूरा पड़ा प्राथमिक शाला भवन: सरकारी लापरवाही या भ्रष्टाचार का उदाहरण?बस्तर ब्लॉक के मधोता-02 खैरगुड़ा में बच्चों की शिक्षा पर खड़ा बड़ा सवाल


“बस्तर ब्लॉक के मधोता-02 खैरगुड़ा में बच्चों की शिक्षा पर खड़ा बड़ा सवाल”

डमरू कश्यप,बस्तर। ग्राम पंचायत मधोता-02 खैरगुड़ा में जिला खनिज न्यास मद (DMF) से स्वीकृत प्राथमिक शाला भवन का निर्माण वर्षों से अधूरा पड़ा है। यह भवन अब खंडहर की शक्ल ले चुका है। चारों ओर उगी झाड़ियाँ, घास और मच्छर-कीटों का आतंक बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।
स्थिति यह है कि ‌स्कूल के सभी बच्चे एक ही कक्षा में पढ़ने को मजबूर हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।

सबसे हैरानी की बात यह है कि सरकारी निर्माण कार्यों के लिए अनिवार्य सूचना पटल तक इस भवन में नहीं लगाया गया, जिससे परियोजना की लागत, समयसीमा और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं है।


“भ्रष्टाचार या अनदेखी – आखिर किसका शिकार यह स्कूल?

स्थानीय निवासियों का साफ आरोप है कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के कारण भवन अधूरा छोड़ दिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन समय बीतने के साथ ठेकेदार और विभाग दोनों ने ही इस पर ध्यान देना बंद कर दिया।

मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना 2022-23 के तहत इसी परिसर में एक और भवन निर्माण कार्य भी प्रारंभ हुआ था, लेकिन वह भी आधा-अधूरा ही छोड़ दिया गया है। सूचना पटल में बारिश के मौसम को छोड़कर चार महीने में निर्माण पूरा करने का दावा किया गया था, किन्तु जमीनी हकीकत उसके बिल्कुल उलट है।

    “ग्रामीण कहते हैं—”
“सरकारी राशि तो आई, पर काम आधा हुआ और पैसा कहां गया, किसी को नहीं पता।”


  “बच्चों की शिक्षा पर संकट”

एक ही कक्षा में पढ़ाई करना बच्चों के लिए न सिर्फ असुविधाजनक है बल्कि स्वास्थ्य व सुरक्षा दोनों दृष्टियों से खतरनाक भी है।
खंडहर में बदले अधूरे भवन के कारण परिसर में सांप-बिच्छू और जहरीले कीटों की भरमार है। यह स्थिति शिक्षा के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।


   “क्या है पूरा मामला?

“DMF मद से प्राथमिक शाला भवन निर्माण की स्वीकृति”

“वर्षों से निर्माण रोक कर भवन अधूरा छोड़ दिया गया”

“दीवारों और परिसर में झाड़ियाँ व जंगली घास

“बच्चों को एक ही कक्षा में बैठकर पढ़ना पड़ रहा

“मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना का भवन भी आधा-अधूरा

“सूचना पटल भी नहीं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल

“ग्रामीणों का आरोप—“राशि खर्च, पर काम अधूरा… भ्रष्टाचार साफ दिख रहा है”


“ग्रामीणों की मांग – कार्रवाई हो और निर्माण तत्काल पूरा किया जाए”

स्थानीय निवासियों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
“उनका कहना है—

“अधूरे पड़े स्कूल भवन का निर्माण तत्काल पूरा कराया जाए

“निर्माण कार्य में देरी और अनियमितता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदार पर जांच व कार्रवाई हो

“बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए


“निष्कर्ष”

मधोता-02 खैरगुड़ा का अधूरा स्कूल भवन केवल एक निर्माणाधीन संरचना नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की खामियों और बच्चों के भविष्य पर मंडराते सवालों का प्रतीक बन चुका है।
अब देखने वाली बात यह है कि सरकार इस मामले में कब और क्या कदम उठाती है।

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