
जगदलपुर। बस्तर जिले में जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ी पहल की है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत “नवा तरिया-आय का जरिया” अभियान शुरू किया गया है, जिसके अंतर्गत जिले के विभिन्न जनपदों में 11 नए सामुदायिक तालाबों के निर्माण को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।
जिला पंचायत बस्तर द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य गांवों को जल समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है। प्रशासन वर्षा जल संचयन की प्रभावी व्यवस्था विकसित कर भू-जल स्तर बढ़ाने और भविष्य में जल संकट को कम करने की दिशा में काम कर रहा है।
अधिकारियों के अनुसार इन सामुदायिक तालाबों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। मनरेगा के तहत स्थानीय मजदूरों को काम मिलेगा, वहीं तालाब तैयार होने के बाद मत्स्य पालन, सिंचाई और अन्य कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन का फोकस महिला स्व-सहायता समूहों को इस अभियान से जोड़ने पर भी है। योजना के जरिए महिलाओं को मत्स्यपालन और जल आधारित आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा, ताकि गांवों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकें।
योजना के तहत तोकापाल जनपद के भेजरीपदर (पाण्डुपारा) में 19 लाख 56 हजार रुपये तथा बास्तानार के कोड़ेनार में 19 लाख रुपये की लागत से तालाब निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा लोहण्डीगुड़ा के तारागांव और तोयर, दरभा के बड़ेकड़मा, बस्तर के मधोता और सोरगांव, बकावण्ड के वनकोमार तथा जगदलपुर के कुम्हली (जीरागांव) सहित कई गांवों में लाखों रुपये की लागत से तालाब निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि यह पहल खेती, पशुपालन और मछली पालन जैसी गतिविधियों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी। लंबे समय से जल संकट और सीमित रोजगार से जूझ रहे गांवों को इस योजना से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
जिला प्रशासन का कहना है कि “नवा तरिया-आय का जरिया” अभियान केवल तालाब निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण आर्थिक विकास को साथ लेकर चलने वाला दीर्घकालिक मॉडल है। आने वाले समय में इस योजना का विस्तार जिले के अन्य क्षेत्रों में भी किया जाएगा।




