छत्तीसगढ़बस्तर संभाग

महतारी सदन निर्माण में लापरवाही उजागर: खुले सेप्टिक टैंक में गिरा बैल, ग्रामीणों ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

,चमिया पंचायत में निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल, ठेकेदार-इंजीनियर की मिलीभगत का आरोप; एसडीओ ने जांच का दिया आश्वासन

बस्तर, 13 मई 2026/ बस्तर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत चमिया में निर्माणाधीन महतारी सदन भवन एक बार फिर विवादों में घिर गया है। भवन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पहले से नाराज ग्रामीणों का गुस्सा उस समय और बढ़ गया, जब निर्माण स्थल पर बने खुले सेप्टिक टैंक में एक बैल गिर गया। घटना के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।

जानकारी के अनुसार शनिवार को गांव का एक बैल निर्माण स्थल के पास घूमते हुए खुले पड़े सेप्टिक टैंक में जा गिरा। टैंक बिना ढक्कन और सुरक्षा घेराबंदी के छोड़ दिया गया था। बैल के गिरने के बाद ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने बैल को सुरक्षित बाहर निकाला।

घटना के बाद ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बैल की जगह कोई बच्चा गिर जाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। लोगों ने आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पूरी तरह उल्लंघन किया जा रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक महतारी सदन भवन का निर्माण प्राक्कलन के विपरीत किया जा रहा है। निर्माण कार्य में घटिया सामग्री उपयोग किए जाने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने कहा कि सीमेंट और कांक्रीट का अनुपात सही नहीं रखा जा रहा, कमजोर सरिया का इस्तेमाल हो रहा है तथा निर्माण की गुणवत्ता पहली नजर में ही संदेहास्पद दिखाई देती है।

ग्रामीणों ने ठेकेदार और संबंधित इंजीनियर पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि कागजों में उच्च गुणवत्ता दर्शाकर भुगतान लिया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर काम मानकों से काफी नीचे किया जा रहा है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

वहीं मामले को लेकर जब बस्तर एसडीओ विविध सिंह से चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने जल्द ही निर्माण स्थल का निरीक्षण कर जांच कराने और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करने की बात कही।

ग्राम पंचायत चमिया में महतारी सदन निर्माण को लेकर उठे सवाल अब केवल निर्माण गुणवत्ता तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यह मामला ग्रामीणों की सुरक्षा और सरकारी कार्यों में पारदर्शिता से भी जुड़ गया है। अब देखना होगा कि प्रशासनिक जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और ग्रामीणों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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